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Q: निर्देश–नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं. 196 से 203) से सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तर सीमा की सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गई। हजारों माँओं की गोंदे सूनी हुई, हजारों की माँग का सिंदूर पुँछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए। गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमंग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियाँ आयोजन में शामिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोंगों के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र के पास पहुँचे। उन्हें गीत पंसद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई। 26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शांति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा– ‘‘ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी’’। समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आँसू थे कि थमते ही न थे। देश का हौसला पस्त था, क्योंकि–
  • A. तैयारियाँ नहीं की गई थी
  • B. कोई उमंग शेष नहीं थी
  • C. फिल्मी हस्तियाँ साथ नहीं दे रही थी
  • D. चीन से मात खाई थी
Correct Answer: Option D - देश का हौसला पस्त था, क्योंकि चीन से मात खाई थी। गद्यांश के प्रथम अनुच्छेद में निहित तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत के साथ चीन का युद्ध हुआ था। जिसमें भारत के बहुत सैनिक शहीद हुए थे, जिससे लोग दु:खी थे और गणतन्त्र दिवस का उत्सव नहीं मनाना चाहते थे। अत: देश का हौसला पस्त था।
D. देश का हौसला पस्त था, क्योंकि चीन से मात खाई थी। गद्यांश के प्रथम अनुच्छेद में निहित तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत के साथ चीन का युद्ध हुआ था। जिसमें भारत के बहुत सैनिक शहीद हुए थे, जिससे लोग दु:खी थे और गणतन्त्र दिवस का उत्सव नहीं मनाना चाहते थे। अत: देश का हौसला पस्त था।

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देश का हौसला पस्त था, क्योंकि चीन से मात खाई थी। गद्यांश के प्रथम अनुच्छेद में निहित तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत के साथ चीन का युद्ध हुआ था। जिसमें भारत के बहुत सैनिक शहीद हुए थे, जिससे लोग दु:खी थे और गणतन्त्र दिवस का उत्सव नहीं मनाना चाहते थे। अत: देश का हौसला पस्त था।