Explanations:
विनोबा भावे द्वारा शुरू किये गये भूदान-ग्रामदान आन्दोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ के नाम से जाना जाता है। आन्ध्र प्रदेश के पोचमपल्ली गाँव के श्री राम चन्द्र रेड्डी द्वारा 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की गई जिसे भूदान के नाम से जाना गया। बाद में विनोबा भावे ने अनेक यात्राएं की और अपना यह विचार पूरे भारत में फैलाया। कुछ जमीदारों ने जो अनेक गाँवों के मालिक थे, भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश की, जिसे ‘ग्रामदान’ कहा गया।