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Q: निर्देश: अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा तदाधारितप्रश्नानां (प्रश्नसंख्या 147-152) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमम् उत्तरं चिनुत। शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात्परं सुखम्। न तृष्णाया: परो व्याधिर्न च धर्मो दयापर: ।।1।। दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्। शास्त्रपूतं वदेद् वाक्यं मन:पूतं समाचरेत् ।। 2।। तावद् भयाद्धि भेतव्यं यावद् भयमनागतम्। आगतं तु भयं दृष्ट्रवा नर: कुर्याद् यथोचितम् ।।3।। माता शत्रु: पिता वैरी येन बालो न पाठित:। न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ।।4।। रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवा:। विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किशुका: ।।5।।
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  • A. अनुप्रास:
  • B. दृष्टान्त:
  • C. श्लेष:
  • D. उपमा
Correct Answer: Option D - `शान्तितुल्यम्' इत्यस्मिन् प्रयोगे `उपमा' अलंकार :। `शान्तितुल्यम्' इस पद के प्रयोग में `उपमा' अलंकार है। उपमा अलंकार – साम्यं वाच्यमवैधर्म्यं वाक्यैक्य उपमा द्वयो:। उपमाया: चत्वारि अङ्गानि भवन्ति। 1. उपमेयम् 2. उपमानम् 3. साधारणधर्म 4. उपमानवाचक शब्द उपमाया: द्वौ भेदौ स्त:– 1.पूर्णोपमा 2. लुप्तोपमा। उदाहरण– मधुर: सुधावदधर: पल्लवतुल्योतिपेलव: पाणि:। चकितमृगलोचनाभ्यां सदृशी चपले च लोचने तस्या:।
D. `शान्तितुल्यम्' इत्यस्मिन् प्रयोगे `उपमा' अलंकार :। `शान्तितुल्यम्' इस पद के प्रयोग में `उपमा' अलंकार है। उपमा अलंकार – साम्यं वाच्यमवैधर्म्यं वाक्यैक्य उपमा द्वयो:। उपमाया: चत्वारि अङ्गानि भवन्ति। 1. उपमेयम् 2. उपमानम् 3. साधारणधर्म 4. उपमानवाचक शब्द उपमाया: द्वौ भेदौ स्त:– 1.पूर्णोपमा 2. लुप्तोपमा। उदाहरण– मधुर: सुधावदधर: पल्लवतुल्योतिपेलव: पाणि:। चकितमृगलोचनाभ्यां सदृशी चपले च लोचने तस्या:।

Explanations:

`शान्तितुल्यम्' इत्यस्मिन् प्रयोगे `उपमा' अलंकार :। `शान्तितुल्यम्' इस पद के प्रयोग में `उपमा' अलंकार है। उपमा अलंकार – साम्यं वाच्यमवैधर्म्यं वाक्यैक्य उपमा द्वयो:। उपमाया: चत्वारि अङ्गानि भवन्ति। 1. उपमेयम् 2. उपमानम् 3. साधारणधर्म 4. उपमानवाचक शब्द उपमाया: द्वौ भेदौ स्त:– 1.पूर्णोपमा 2. लुप्तोपमा। उदाहरण– मधुर: सुधावदधर: पल्लवतुल्योतिपेलव: पाणि:। चकितमृगलोचनाभ्यां सदृशी चपले च लोचने तस्या:।