Correct Answer:
Option E - दिये गये विकल्पों में कोई भी आदि कालीन जैन साहित्यकार नहीं है। चर्पट नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक गोरखनाथ के शिष्य थे। नरपतिनाल्ह ने राजस्थानी भाषा में ‘बीसलदेव रासो’ की रचना की। नागार्जुन (बौद्ध दर्शन) शून्यवाद के प्रतिष्ठापक तथा माध्यमिक मत के प्रसिद्ध बौद्ध आचार्य थे।
E. दिये गये विकल्पों में कोई भी आदि कालीन जैन साहित्यकार नहीं है। चर्पट नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक गोरखनाथ के शिष्य थे। नरपतिनाल्ह ने राजस्थानी भाषा में ‘बीसलदेव रासो’ की रचना की। नागार्जुन (बौद्ध दर्शन) शून्यवाद के प्रतिष्ठापक तथा माध्यमिक मत के प्रसिद्ध बौद्ध आचार्य थे।