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Q: निर्देश: अधोलिखितं श्लोकम् पठित्वा तदाधारितप्रश्नानां (प्रश्न संख्या 264-269) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखत। शोको नाशयते धैर्यं, शोको नाशयते श्रुतम्। शोको नाशयते सर्वं, नास्ति शोकसमो रिपु:।। गौरवं प्राप्यते दानात् न तु वित्तस्य सञ्चयात्। स्थितिरुच्चै: पयोदानां पयोधीनामध: स्थिति:।। सद्भिस्तु लीलया प्रोक्तं शिलालिखितमक्षरम्। असद्भि: शपथेनापि जले लिखितमक्षरम् ।। भवन्ति नम्रास्तरव: फलोद्गमै: नवाम्बुभिर्भूरिविलम्बिनो घना:। अनुद्धता: सत्पुरुषा: समृद्धिभि: स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्।। काष्ठादग्निर्जायते मध्यमानाद् भूमिस्तोयं खन्यमाना ददाति। सोत्साहानां नास्त्यसाध्यं नराणां मार्गारब्धा: सर्वयत्ना: फलन्ति।।तरव: केन कारणेन नम्रा: भवन्ति?
  • A. समृद्धिभि:
  • B. पुष्पोद्गमै:
  • C. नवाम्बुभि:
  • D. फलोद्गमै:
Correct Answer: Option D - ‘भवन्ति नम्रास्तरव: फलोद्गमै:’ अर्थात् वृक्ष फलों से लद जाने पर नम्र हो जाते हैं अर्थात् झुक जाते हैं। इसी प्रकार सत्पुरुष समृद्धि के प्राप्त हो जाने पर नत हो जाते हैं।
D. ‘भवन्ति नम्रास्तरव: फलोद्गमै:’ अर्थात् वृक्ष फलों से लद जाने पर नम्र हो जाते हैं अर्थात् झुक जाते हैं। इसी प्रकार सत्पुरुष समृद्धि के प्राप्त हो जाने पर नत हो जाते हैं।

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‘भवन्ति नम्रास्तरव: फलोद्गमै:’ अर्थात् वृक्ष फलों से लद जाने पर नम्र हो जाते हैं अर्थात् झुक जाते हैं। इसी प्रकार सत्पुरुष समृद्धि के प्राप्त हो जाने पर नत हो जाते हैं।