Correct Answer:
Option E - भारत में संसदीय शासन व्यवस्था को अपनाया गया है। संसदीय प्रणाली में विधायिका और कार्यपालिका का अलग-अलग होना सम्भव नहीं है। क्योंकि संसदीय शासन प्रणाली उत्तरदायित्व के सिद्धान्त के आधार पर काम करती है। सरकार का कोई भी अंग निरंकुश न हो जाय। इसीलिए संविधान में रोकथाम (Check and Balance) की व्यवस्था की गयी है। इसी उद्देश्य से कार्यपालिका को व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी बनाया गया है। अर्थात विधायिका और कार्यपालिका एक दूसरे से स्वतन्त्र नहीं है। इसके अतिरिक्त विधायिका तथा कार्यपालिका के मनमानी पूर्ण कृत्यों के ऊपर नियंत्रण के लिए, न्यायपालिका को यह शक्ति दी गयी है कि वह इनके संविधान के विरूद्ध कार्यों को अविधिमान्य घोषित करके उन्हें अपनी सीमा में कार्य करने के लिए बाध्य करे। नोट- संविधान के अनु. 79 में संसद के गठन की बात की गयी है जिसके तीन अंग है। (1) राष्ट्रपति, (2) लोकसभा, (3) राज्यसभा
E. भारत में संसदीय शासन व्यवस्था को अपनाया गया है। संसदीय प्रणाली में विधायिका और कार्यपालिका का अलग-अलग होना सम्भव नहीं है। क्योंकि संसदीय शासन प्रणाली उत्तरदायित्व के सिद्धान्त के आधार पर काम करती है। सरकार का कोई भी अंग निरंकुश न हो जाय। इसीलिए संविधान में रोकथाम (Check and Balance) की व्यवस्था की गयी है। इसी उद्देश्य से कार्यपालिका को व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी बनाया गया है। अर्थात विधायिका और कार्यपालिका एक दूसरे से स्वतन्त्र नहीं है। इसके अतिरिक्त विधायिका तथा कार्यपालिका के मनमानी पूर्ण कृत्यों के ऊपर नियंत्रण के लिए, न्यायपालिका को यह शक्ति दी गयी है कि वह इनके संविधान के विरूद्ध कार्यों को अविधिमान्य घोषित करके उन्हें अपनी सीमा में कार्य करने के लिए बाध्य करे। नोट- संविधान के अनु. 79 में संसद के गठन की बात की गयी है जिसके तीन अंग है। (1) राष्ट्रपति, (2) लोकसभा, (3) राज्यसभा