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Q: निर्देश: अधोलिखितं श्लोकम् पठित्वा तदाधारितप्रश्नानां (प्रश्न संख्या 243-248 विकल्पात्मकोत्तरेषु समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखत। येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्म:। ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता:, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति।।ते मनुष्या:भूमौ भार: सन्ति
  • A. ये विद्याहीना:
  • B. ये ज्ञानिन:
  • C. ये परिश्रमशीला:
  • D. ये दानशीला:
Correct Answer: Option A - जो मनुष्य विद्या से हीन है, वे पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं। विद्यावान पुरुष सदाचरण करता है। सही तरह से जीवन यापन करता है और वैसे ही भावाचरण की समाज के बीच स्थापना करता है।
A. जो मनुष्य विद्या से हीन है, वे पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं। विद्यावान पुरुष सदाचरण करता है। सही तरह से जीवन यापन करता है और वैसे ही भावाचरण की समाज के बीच स्थापना करता है।

Explanations:

जो मनुष्य विद्या से हीन है, वे पृथ्वी पर भार स्वरूप होते हैं। विद्यावान पुरुष सदाचरण करता है। सही तरह से जीवन यापन करता है और वैसे ही भावाचरण की समाज के बीच स्थापना करता है।