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Q: निर्देश:–अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा तदाधारितप्रश्नानां (प्रश्नसंख्या 140-) विकल्पात्मकोत्तरेषु: उचिततमम् उत्तरं चिनुत। नर्मदातीरे एक: वृक्ष: आसीत्। तत्र स्वपरिश्रमेण निर्मितेषु नीडेषु खगा: सुखेन वसन्ति स्म। एकदा महती वृष्टि: अभवत्। स: वानर: वृष्टिजलेन अतीव आद्र्र: कम्पित: च अभवत्। खगा: शीतेन कम्पमानं वानरम् अवदन् – भो वानर! त्वं कष्टम् अनुभवसि। तत् कथं गृहस्य निर्माणं न करोषि! यदा स: वानर: एतत् अशृणोत् तदा स: अचिन्तयत् – अहो! एते क्षुद्रा: खगा: मां निन्दन्ति। स: वानर: खगानां नीडानि वृक्षात् अध: अपातयत्। खगानां नीडै: सह तेषाम् अण्डानि अपि नष्टानि। सत्यम् एव उक्तम् – उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये। खगा: कुत्र अवसन्?
  • A. शाखासु
  • B. वृक्षमूले
  • C. वृक्षगुल्मेषु
  • D. नीडेषु
Correct Answer: Option D - खगा: नीडेषु अवसन्। पक्षियाँ घोंसले में रहती थीं। नर्मदा नदी के किनारे एक वृक्ष था। उसी वृक्ष पर पक्षियाँ अपना घोंसला बनाकर रहती थीं। नीडेषु सप्तमी विभक्ति बहुवचन का रूप है।
D. खगा: नीडेषु अवसन्। पक्षियाँ घोंसले में रहती थीं। नर्मदा नदी के किनारे एक वृक्ष था। उसी वृक्ष पर पक्षियाँ अपना घोंसला बनाकर रहती थीं। नीडेषु सप्तमी विभक्ति बहुवचन का रूप है।

Explanations:

खगा: नीडेषु अवसन्। पक्षियाँ घोंसले में रहती थीं। नर्मदा नदी के किनारे एक वृक्ष था। उसी वृक्ष पर पक्षियाँ अपना घोंसला बनाकर रहती थीं। नीडेषु सप्तमी विभक्ति बहुवचन का रूप है।