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Q: ‘निरत्ययं साम न दानवर्जितम्’ इत्यस्मिन् श्लोकांशे ‘निरत्ययम्’ इति पदे समासोऽस्ति
  • A. अव्ययीभाव:
  • B. तत्पुरुष:
  • C. कर्मधारय:
  • D. बहुव्रीहि:
Correct Answer: Option D - ‘निरत्ययं साम न दान वर्जितम्’ इत्यस्मिन् श्लोकांशे ‘निरत्ययम्’ इति पदे बहुव्रीहि समास: अस्ति। यह सूक्ति भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग से है। यहाँ ‘निरत्ययं’ शब्द ‘दुर्योधन’ के लिए आया है। ‘निरत्ययं साम न दानवर्जितम्’ अर्थात् न्याय करने में दुर्योधन कभी पक्षपात नहीं करता था। नोट– इस प्रश्न में आयोग ने अव्ययीभाव समास एवं बहुव्रीहि समास दोनों माना है।
D. ‘निरत्ययं साम न दान वर्जितम्’ इत्यस्मिन् श्लोकांशे ‘निरत्ययम्’ इति पदे बहुव्रीहि समास: अस्ति। यह सूक्ति भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग से है। यहाँ ‘निरत्ययं’ शब्द ‘दुर्योधन’ के लिए आया है। ‘निरत्ययं साम न दानवर्जितम्’ अर्थात् न्याय करने में दुर्योधन कभी पक्षपात नहीं करता था। नोट– इस प्रश्न में आयोग ने अव्ययीभाव समास एवं बहुव्रीहि समास दोनों माना है।

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‘निरत्ययं साम न दान वर्जितम्’ इत्यस्मिन् श्लोकांशे ‘निरत्ययम्’ इति पदे बहुव्रीहि समास: अस्ति। यह सूक्ति भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग से है। यहाँ ‘निरत्ययं’ शब्द ‘दुर्योधन’ के लिए आया है। ‘निरत्ययं साम न दानवर्जितम्’ अर्थात् न्याय करने में दुर्योधन कभी पक्षपात नहीं करता था। नोट– इस प्रश्न में आयोग ने अव्ययीभाव समास एवं बहुव्रीहि समास दोनों माना है।