Correct Answer:
Option C - ‘चीड़ों पर चाँदनी’ (1964 ई.) निर्मल वर्मा का यात्रा-संस्मरण है। इसमेें निर्मल वर्मा जी ने अपने यूरोप प्रवास का वर्णन किया है। निर्मल वर्मा अवसाद, निराशा, अलगाव-बोध, संत्रासभाव, मन की अन्धकार भरी गुफाओं में भटकने वाली चेतना के उपन्यासकार हैं।
C. ‘चीड़ों पर चाँदनी’ (1964 ई.) निर्मल वर्मा का यात्रा-संस्मरण है। इसमेें निर्मल वर्मा जी ने अपने यूरोप प्रवास का वर्णन किया है। निर्मल वर्मा अवसाद, निराशा, अलगाव-बोध, संत्रासभाव, मन की अन्धकार भरी गुफाओं में भटकने वाली चेतना के उपन्यासकार हैं।