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Q: ‘नारीभि: सह मोदमाना:’ इत्यत्र ‘मोदमाना:’ अस्मिन् पदे को धातु: कश्च प्रत्यय:?
  • A. मुद् धातु: णमुल् प्रत्यय:
  • B. मुद् धातु: शतृ प्रत्यय:
  • C. मुद् धातु: कामच् प्रत्यय:
  • D. मुद् धातु: शानच् प्रत्यय:
Correct Answer: Option D - ‘नारीभि: सह मोदमाना:’ इत्यत्र मोदमाना अस्मिन् पदे मुद् धातु: शानच् प्रत्यय:। ‘नारीभि: सह मोदमाना’ ‘मोदमाना’ पद में मुद् धातु शानच् प्रत्यय है। शतृ और शानच् को संस्कृत वैयाकरण सत् कहते हैं। सत् का अर्थ है - ‘विद्यमान’, ‘वर्तमान’। शानच् प्रत्यय का ‘आन’ शेष रहता है। शानच् प्रत्यय का प्रयोग आत्मनेपदी धातुओं में होता है। यदि शानच् के पूर्व अकारान्त धातु रूप आये तो शानच् (आन) के स्थान पर ‘मान’ जुड़ता है अन्यथा ‘आन’। आस् धातु के बाद शानच् आने से शानच् के ‘आन’ को ‘ईन’ हो जाता है। जैसे - आस् + शानच् · आसीन।
D. ‘नारीभि: सह मोदमाना:’ इत्यत्र मोदमाना अस्मिन् पदे मुद् धातु: शानच् प्रत्यय:। ‘नारीभि: सह मोदमाना’ ‘मोदमाना’ पद में मुद् धातु शानच् प्रत्यय है। शतृ और शानच् को संस्कृत वैयाकरण सत् कहते हैं। सत् का अर्थ है - ‘विद्यमान’, ‘वर्तमान’। शानच् प्रत्यय का ‘आन’ शेष रहता है। शानच् प्रत्यय का प्रयोग आत्मनेपदी धातुओं में होता है। यदि शानच् के पूर्व अकारान्त धातु रूप आये तो शानच् (आन) के स्थान पर ‘मान’ जुड़ता है अन्यथा ‘आन’। आस् धातु के बाद शानच् आने से शानच् के ‘आन’ को ‘ईन’ हो जाता है। जैसे - आस् + शानच् · आसीन।

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‘नारीभि: सह मोदमाना:’ इत्यत्र मोदमाना अस्मिन् पदे मुद् धातु: शानच् प्रत्यय:। ‘नारीभि: सह मोदमाना’ ‘मोदमाना’ पद में मुद् धातु शानच् प्रत्यय है। शतृ और शानच् को संस्कृत वैयाकरण सत् कहते हैं। सत् का अर्थ है - ‘विद्यमान’, ‘वर्तमान’। शानच् प्रत्यय का ‘आन’ शेष रहता है। शानच् प्रत्यय का प्रयोग आत्मनेपदी धातुओं में होता है। यदि शानच् के पूर्व अकारान्त धातु रूप आये तो शानच् (आन) के स्थान पर ‘मान’ जुड़ता है अन्यथा ‘आन’। आस् धातु के बाद शानच् आने से शानच् के ‘आन’ को ‘ईन’ हो जाता है। जैसे - आस् + शानच् · आसीन।