Correct Answer:
Option A - ङीप् प्रत्यय योगाद् निष्पन्नं पदं ‘नदी’ अस्ति।
अर्थात् ङीप् प्रत्यय के योग से निष्पन्न पद ‘नदी’ है।
सूत्र- ‘टिड्ढाणञ्द्वयसज्दध्नञ्मात्रच्तयप्ठक्ठञ्क्ञ्क्वरप:’ अर्थात् टित् (ट इत् हो) ढक्, अण्, अञ्, द्वयसच्, मात्रच्, दध्नञ्, तयप्, ठक्, ठञ्, कञ्, और क्वरप् प्रत्ययों में अन्त होने वाले शब्दों से ङीप् प्रत्यय होता है। नदट् (ट इत्) ङीप् होकर ‘नदी’ देवी, चोरी तथा सौपर्णेयी, ऐन्द्री, औत्सी, आक्षिकी, लावणिकी, यादृशी, इत्वरी पद निष्पन्न होते हैं। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (a) सही है शेष अन्य विकल्प इस प्रकार अग्रलिखित हैं-
(ं) ब्राह्मणी में ‘जातेरस्त्रीविषयादयोपधात्’ सूत्र से ङीष्,
(म्) तटी में जातेरादिसूत्र से ङीष् प्रत्यय तथा
(्) भवानी में ‘इन्द्र-वरुण-भव शर्व-रुद्र-मृड- हिमारण्य-यव-यवन- मातुलाचार्याणामानुक्’ सूत्र से ङीष् प्रत्यय होता है।
A. ङीप् प्रत्यय योगाद् निष्पन्नं पदं ‘नदी’ अस्ति।
अर्थात् ङीप् प्रत्यय के योग से निष्पन्न पद ‘नदी’ है।
सूत्र- ‘टिड्ढाणञ्द्वयसज्दध्नञ्मात्रच्तयप्ठक्ठञ्क्ञ्क्वरप:’ अर्थात् टित् (ट इत् हो) ढक्, अण्, अञ्, द्वयसच्, मात्रच्, दध्नञ्, तयप्, ठक्, ठञ्, कञ्, और क्वरप् प्रत्ययों में अन्त होने वाले शब्दों से ङीप् प्रत्यय होता है। नदट् (ट इत्) ङीप् होकर ‘नदी’ देवी, चोरी तथा सौपर्णेयी, ऐन्द्री, औत्सी, आक्षिकी, लावणिकी, यादृशी, इत्वरी पद निष्पन्न होते हैं। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (a) सही है शेष अन्य विकल्प इस प्रकार अग्रलिखित हैं-
(ं) ब्राह्मणी में ‘जातेरस्त्रीविषयादयोपधात्’ सूत्र से ङीष्,
(म्) तटी में जातेरादिसूत्र से ङीष् प्रत्यय तथा
(्) भवानी में ‘इन्द्र-वरुण-भव शर्व-रुद्र-मृड- हिमारण्य-यव-यवन- मातुलाचार्याणामानुक्’ सूत्र से ङीष् प्रत्यय होता है।