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Q: ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’’ के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - 1. इस योजना में केवल साहीवाल, गिर, थारपारकर एवं गंगातीरी प्रजाति की दुधारू गायें ही सम्मिलित की गई हैं। 2. लाभार्थी के पास गो-पालन का कम से कम एक वर्ष का अनुभव होना चाहिए। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए - कूट :
  • A. न तो 1 ना ही 2
  • B. केवल 2
  • C. केवल 1
  • D. 1 और 2 दोनों
Correct Answer: Option C - नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अन्तर्गत गौवंशीय पशुओं में नस्ल सुधार एवं दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि हेतु नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना शुरू की गई है। जिसके तहत प्रदेश में 25 दुधारू गायों की 35 इकाइयां स्थापित की जायेंगी। दुधारू गायों में साहीवाल, गिर, थारपारकर एवं गंगातीरी प्रजाति की गायें सम्मिलित की जायेंगी। इस योजना के तहत लाभार्थी को स्थानीय निवासी होना चाहिए तथा गो-पालन या महिष पालन का कम से कम तीन वर्षों का अनुभव होना चाहिए। जिसका प्रमाण सम्बन्धित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा दिया गया हो। साथ ही इकाई स्थापना के लिए 0.5 एकड़ भूमि तथा चारा उत्पादन हेतु 1.5 एकड़ भूमि स्वयं की अथवा कम से कम 7 वर्षों के लिए लीज पर ली गई हो।
C. नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अन्तर्गत गौवंशीय पशुओं में नस्ल सुधार एवं दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि हेतु नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना शुरू की गई है। जिसके तहत प्रदेश में 25 दुधारू गायों की 35 इकाइयां स्थापित की जायेंगी। दुधारू गायों में साहीवाल, गिर, थारपारकर एवं गंगातीरी प्रजाति की गायें सम्मिलित की जायेंगी। इस योजना के तहत लाभार्थी को स्थानीय निवासी होना चाहिए तथा गो-पालन या महिष पालन का कम से कम तीन वर्षों का अनुभव होना चाहिए। जिसका प्रमाण सम्बन्धित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा दिया गया हो। साथ ही इकाई स्थापना के लिए 0.5 एकड़ भूमि तथा चारा उत्पादन हेतु 1.5 एकड़ भूमि स्वयं की अथवा कम से कम 7 वर्षों के लिए लीज पर ली गई हो।

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नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अन्तर्गत गौवंशीय पशुओं में नस्ल सुधार एवं दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि हेतु नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना शुरू की गई है। जिसके तहत प्रदेश में 25 दुधारू गायों की 35 इकाइयां स्थापित की जायेंगी। दुधारू गायों में साहीवाल, गिर, थारपारकर एवं गंगातीरी प्रजाति की गायें सम्मिलित की जायेंगी। इस योजना के तहत लाभार्थी को स्थानीय निवासी होना चाहिए तथा गो-पालन या महिष पालन का कम से कम तीन वर्षों का अनुभव होना चाहिए। जिसका प्रमाण सम्बन्धित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा दिया गया हो। साथ ही इकाई स्थापना के लिए 0.5 एकड़ भूमि तथा चारा उत्पादन हेतु 1.5 एकड़ भूमि स्वयं की अथवा कम से कम 7 वर्षों के लिए लीज पर ली गई हो।