Correct Answer:
Option B - `शिलप्पदिकारम' संगमकालीन महाकाव्य है इसकी रचना चेर शासक शेनुगुट्टवन के अनुज इलांगोआदिगल ने की थी।
मणिमेखलै─यह भी संगमकालीन महाकाव्य है। इसकी रचना मदुरा के एक अनाज व्यापारी सीतलैसत्तनार ने की थी। यह बौद्ध था।
कुरल─इसके प्रवेता कवि तिरूवल्लुवर हैं। इसमें उनकी तथा उनकी पत्नी की कहानियाँ मिलती हैं। इसे तमिल साहित्य का बाइबिल अथवा पंचमवेद भी माना जाता है।
तिरुमदल─इस ग्रंथ की रचना तिरुमंगें अलवार ने की थी।
B. `शिलप्पदिकारम' संगमकालीन महाकाव्य है इसकी रचना चेर शासक शेनुगुट्टवन के अनुज इलांगोआदिगल ने की थी।
मणिमेखलै─यह भी संगमकालीन महाकाव्य है। इसकी रचना मदुरा के एक अनाज व्यापारी सीतलैसत्तनार ने की थी। यह बौद्ध था।
कुरल─इसके प्रवेता कवि तिरूवल्लुवर हैं। इसमें उनकी तथा उनकी पत्नी की कहानियाँ मिलती हैं। इसे तमिल साहित्य का बाइबिल अथवा पंचमवेद भी माना जाता है।
तिरुमदल─इस ग्रंथ की रचना तिरुमंगें अलवार ने की थी।