Correct Answer:
Option A - धर्म, ईश्वर तथा व्यक्तिवाद में आस्था हिन्दी साहित्य में प्रगतिवाद काल की प्रवृत्तियां नहीं है। प्रगतिवाद काल की प्रवृत्तियाँ निम्नवत् है:
(i) सामाजिकता का आग्रह।
(ii) शोषित वर्ग के प्रति सहानुभूति एवं शोषक वर्ग के प्रति घृणा।
(iii) जनसामान्य के प्रति लोकमंगल की कामना।
(iv) पूँजीवादी व्यवस्था और प्रवृत्ति का विरोध।
(v) सामाजिक चेतना और भावबोध का लक्ष्य।
A. धर्म, ईश्वर तथा व्यक्तिवाद में आस्था हिन्दी साहित्य में प्रगतिवाद काल की प्रवृत्तियां नहीं है। प्रगतिवाद काल की प्रवृत्तियाँ निम्नवत् है:
(i) सामाजिकता का आग्रह।
(ii) शोषित वर्ग के प्रति सहानुभूति एवं शोषक वर्ग के प्रति घृणा।
(iii) जनसामान्य के प्रति लोकमंगल की कामना।
(iv) पूँजीवादी व्यवस्था और प्रवृत्ति का विरोध।
(v) सामाजिक चेतना और भावबोध का लक्ष्य।