Correct Answer:
Option D - दिये गये विकल्पों में ‘नाविक’ व्यंजन संधि वाला शब्द नहीं है। ‘नाविक’ शब्द का संधि-विच्छेद ‘नौ + इक’ होता है। यह अयादि संधि का उदाहरण है। इस संधि के नियमानुसार यदि ए, ऐ, ओ, औं, के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ‘ए’ का ‘अय्’, ‘ऐ’ का ‘आय्’, ‘ओ’ का ‘अव्’, तथा ‘औं’ का ‘आव्’ हो जाता है।
अन्य विकल्पों का संधि-विच्छेद निम्न है-
वागीश = वाक् + ईश
षडानन = षट् + आनन
जगन्नाथ = जगत् + नाथ
D. दिये गये विकल्पों में ‘नाविक’ व्यंजन संधि वाला शब्द नहीं है। ‘नाविक’ शब्द का संधि-विच्छेद ‘नौ + इक’ होता है। यह अयादि संधि का उदाहरण है। इस संधि के नियमानुसार यदि ए, ऐ, ओ, औं, के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ‘ए’ का ‘अय्’, ‘ऐ’ का ‘आय्’, ‘ओ’ का ‘अव्’, तथा ‘औं’ का ‘आव्’ हो जाता है।
अन्य विकल्पों का संधि-विच्छेद निम्न है-
वागीश = वाक् + ईश
षडानन = षट् + आनन
जगन्नाथ = जगत् + नाथ