Correct Answer:
Option B - उक्त चारों विकल्पों में ‘श्रान्ता: जना: शीघ्रं शेरते’ शुद्ध वाक्य है। यह वाक्य कर्तृप्रधान है। कर्तृवाच्य में कर्त्ता में प्रथमा और कर्म में द्वितीया विभक्ति आती है। क्रिया का रूप कर्त्ता के अनुसार पुरुष, वचन और लिङ्ग के अनुसार होता है। यहाँ पर श्रान्ता:जना: कर्ता है जो बहुवचन का रूप है इसलिए क्रिया में भी बहुवचन शेरते का प्रयोग हुआ है। कर्म शीघ्रं में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है।
B. उक्त चारों विकल्पों में ‘श्रान्ता: जना: शीघ्रं शेरते’ शुद्ध वाक्य है। यह वाक्य कर्तृप्रधान है। कर्तृवाच्य में कर्त्ता में प्रथमा और कर्म में द्वितीया विभक्ति आती है। क्रिया का रूप कर्त्ता के अनुसार पुरुष, वचन और लिङ्ग के अनुसार होता है। यहाँ पर श्रान्ता:जना: कर्ता है जो बहुवचन का रूप है इसलिए क्रिया में भी बहुवचन शेरते का प्रयोग हुआ है। कर्म शीघ्रं में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है।