Correct Answer:
Option A - काव्यशास्त्रे रससम्प्रदायस्य प्रवर्तक: आचार्य: ‘‘भरतमुनि:’’ च। अर्थात् काव्यशास्त्र में रससम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भरतमुनि हैं। भरतमुनि ने रससूत्र- ‘विभावानुभावव्यभिचारिभावाद्रस निष्पत्ति:’। अर्थात् विभाव-अनुभाव तथा व्यभिचारि भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
विश्वनाथ ने - ‘रसात्मकं वाक्यं काव्यं’ अर्थात रसात्मक वाक्य को काव्य कहा है।
मम्मट- ध्वनिवादी आचार्य हैं।
समुचित विकल्प: A इति अस्ति।
A. काव्यशास्त्रे रससम्प्रदायस्य प्रवर्तक: आचार्य: ‘‘भरतमुनि:’’ च। अर्थात् काव्यशास्त्र में रससम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भरतमुनि हैं। भरतमुनि ने रससूत्र- ‘विभावानुभावव्यभिचारिभावाद्रस निष्पत्ति:’। अर्थात् विभाव-अनुभाव तथा व्यभिचारि भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
विश्वनाथ ने - ‘रसात्मकं वाक्यं काव्यं’ अर्थात रसात्मक वाक्य को काव्य कहा है।
मम्मट- ध्वनिवादी आचार्य हैं।
समुचित विकल्प: A इति अस्ति।