Given below are two statements, one is labelled as Assertion (A) and the other is labelled as Reason (R)/नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है। Assertion (A) : River Narmada makes delta at its mouth/अभिकथन (A) : नर्मदा नदी अपने मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती है। Reason (R) : It flows throuth a rift valley/कारण (R) : यह एक भ्रंश घाटी से बहती है। Select the correct answer from the codes given below. नीचे दिये गये कूटों में से सही उत्तर चुनिये :
नीचे शब्दों के चार जोड़े दिए गए हैं जिनमें से तीन किसी तरीके से समान हैं और एक जोड़ा अलग है। कौन–सा जोड़ा बाकियों से अलग है ?
टाटा स्टील मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट 2025 का टाइटल किसने जीता?
Select the correct option that indicates the arrangement of the given words in the order in which they appear in an English dictionary. 1. Serenity 2. Serpent 3. Serviceable 4. Sericulture 5. Serotonin
Consider the following statements: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 1. No person is eligible for appointment as Governor unless he has completed the age of thirty years./कोई व्यक्ति, जब तक उसने 30 वर्ष की आयु पूरी न की हो, राज्यपाल के रूप में नियुक्ति का पात्र नहीं है। 2. The same person can be appointed as Governor for three States./एक ही व्यक्ति तीन राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। Which of the statements given is/are correct? उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
The internalization of values comes under : मूल्यों का आंतरिककरण निम्न के अंतर्गत आता है:
2 kWh = ?
कस्मिश्चिन्नगरे मन्थरको नाम तन्तुवाय: प्रतिवसति स्म। कदाचित् तस्य सर्वाणि उपकराणि भग्नानि। तत: कुठारमादाय स: काष्ठार्थं वनं गत:। वने एकं शिंशपापादपं अपश्यत्। स: चिन्तितवान् - महानयं वृक्ष: दृश्यते। तदनेन कर्तितेन प्रभूतानि पटकर्मोपकरणानि भविष्यन्ति। इति विचार्य स: तस्योपरि कुठारम् उत्क्षिप्तवान्। तस्मिन् वृक्षे कश्चित् यक्ष: समाश्रित आसीत्। स: तं तन्तुवायम् उक्तवान् - भो:! अयं पादप: मम आश्रय: भवति। तस्मादयं सर्वथा रक्षणीय:। यतोऽहमत्र सौख्येन तिष्ठामि। तदाकण्यं तन्तुवाय: आह-भो:! अहं किं करोमि। काष्ठसामग्रीं विना मे कुटुम्ब: बुभुक्षया पीड्यते। तस्मात्त्वम् अन्यत्र गम्यताम्। अहम् एनं कर्तिष्यामि। यक्ष आह- भो: ! अहं तुष्टोऽस्मि। तत्प्राथ्यंतामभीष्टम् एनं पादपं च रक्ष। तदा तन्तुवाय: अवदत् - इदानीं स्वगृहं गत्वा स्वमित्रं स्वभार्याम् च पृष्ट्वा आगमिष्यामि। यक्ष: अनुमतिं दत्तवान्। 1. रक्षाया: योग्यः इत्यर्थे कः पदः अनुच्छेदे प्रयुक्त: तच्चित्वा लिखित-
एक ‘चाबी’ ..... के अन्तर्गत होती है–
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Explanations:
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