Correct Answer:
Option B - उपादान लक्षणा शब्द शक्ति का दूसरा नाम ‘अजहत्स्वार्थी’ है। जहाँ वाक्यार्थ की संगति के लिए अन्य अर्थ लक्षित किये जाने पर भी अपना अर्थ न छूटे वहाँ उपादान लक्षणा होती है। इसमें वाच्यार्थ सर्वथा परित्याग नहीं होता। अत: इसे ‘अजहत्स्वार्थी’ कहते हैं अर्थात् जिसमें अपना स्वार्थ न छूट गया हो।
B. उपादान लक्षणा शब्द शक्ति का दूसरा नाम ‘अजहत्स्वार्थी’ है। जहाँ वाक्यार्थ की संगति के लिए अन्य अर्थ लक्षित किये जाने पर भी अपना अर्थ न छूटे वहाँ उपादान लक्षणा होती है। इसमें वाच्यार्थ सर्वथा परित्याग नहीं होता। अत: इसे ‘अजहत्स्वार्थी’ कहते हैं अर्थात् जिसमें अपना स्वार्थ न छूट गया हो।