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Q: निम्नलिखित में से किस आन्दोलन में हिन्दू-मुस्लिम एकता का वास्तविक रूप प्रतिबिम्बित हुआ?
  • A. भारत छोड़ो आन्दोलन
  • B. स्वदेशी आन्दोलन
  • C. खिलाफत आन्दोलन
  • D. सविनय अवज्ञा आन्दोलन
Correct Answer: Option C - प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन एवं तुर्की के मध्य होने वाली ‘‘सेवर्स की सन्धि’’ से तुर्की के सुल्तान के समस्त अधिकार छिन गए। सम्पूर्ण विश्व के मुसलमान तुर्की के सुल्तान को अपना खलीफा मानते थे। प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीय मुसलमानों ने तुर्की के खिलाफ अंग्रेजों की इस शर्त पर सहायता कि वे भारतीय मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करें और साथ ही उनके धर्मस्थलों की रक्षा करें। परन्तु युद्ध में इंग्लैण्ड की विजय के बाद सरकार अपने वायदे से मुकर गई। भारतीय मुसलमान ब्रिटिश सरकार से नफरत करने लगे। महात्मा गाँधी ने मुसलमानों के साथ सहानुभूति व्यक्त की। 23 नवम्बर, 1919 ई. को ‘‘दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी’’ का अधिवेशन हुआ और गाँधी जी को इसका अध्यक्ष चुना गया।
C. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन एवं तुर्की के मध्य होने वाली ‘‘सेवर्स की सन्धि’’ से तुर्की के सुल्तान के समस्त अधिकार छिन गए। सम्पूर्ण विश्व के मुसलमान तुर्की के सुल्तान को अपना खलीफा मानते थे। प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीय मुसलमानों ने तुर्की के खिलाफ अंग्रेजों की इस शर्त पर सहायता कि वे भारतीय मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करें और साथ ही उनके धर्मस्थलों की रक्षा करें। परन्तु युद्ध में इंग्लैण्ड की विजय के बाद सरकार अपने वायदे से मुकर गई। भारतीय मुसलमान ब्रिटिश सरकार से नफरत करने लगे। महात्मा गाँधी ने मुसलमानों के साथ सहानुभूति व्यक्त की। 23 नवम्बर, 1919 ई. को ‘‘दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी’’ का अधिवेशन हुआ और गाँधी जी को इसका अध्यक्ष चुना गया।

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प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन एवं तुर्की के मध्य होने वाली ‘‘सेवर्स की सन्धि’’ से तुर्की के सुल्तान के समस्त अधिकार छिन गए। सम्पूर्ण विश्व के मुसलमान तुर्की के सुल्तान को अपना खलीफा मानते थे। प्रथम विश्वयुद्ध में भारतीय मुसलमानों ने तुर्की के खिलाफ अंग्रेजों की इस शर्त पर सहायता कि वे भारतीय मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करें और साथ ही उनके धर्मस्थलों की रक्षा करें। परन्तु युद्ध में इंग्लैण्ड की विजय के बाद सरकार अपने वायदे से मुकर गई। भारतीय मुसलमान ब्रिटिश सरकार से नफरत करने लगे। महात्मा गाँधी ने मुसलमानों के साथ सहानुभूति व्यक्त की। 23 नवम्बर, 1919 ई. को ‘‘दिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी’’ का अधिवेशन हुआ और गाँधी जी को इसका अध्यक्ष चुना गया।