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Q: निम्नलिखित में से कौन-सी संस्था भारत में रेपो-दर और रिवर्स रेपो-दर निर्धारित करती है?
  • A. वित्त मंत्रालय
  • B. भारतीय स्टेट बैंक
  • C. भारतीय रिजर्व बैंक
  • D. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक
Correct Answer: Option C - भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना RBI Act, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 2 अप्रैल, 1934 को हुई। 1 जनवरी, 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के अन्तर्गत प्रत्येक दो माह पर आर्थिक नीतियों की समीक्षा करता है जिसमें रेपों दर और रिवर्स रेपों दर आदि तय किये जाते है। जिस दर पर वाणिज्यिक बैंक रिजर्व बैंक से ऋण प्राप्त करते है, उसे रेपो दर तथा जिस दर पर रि़जर्व बैंक वाणिज्यिक बैंको से ऋण लेता है, उसे रिवर्स रेपो दर कहा जाता है। यदि आरबीआई रेपों दर बढ़ाता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था में महगाई घटेगी वहीं रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाने से अर्थव्यवस्था में तरलता की कमी आयेगी इसके द्वारा मुद्रास्फीति में नियंत्रण होगा।
C. भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना RBI Act, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 2 अप्रैल, 1934 को हुई। 1 जनवरी, 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के अन्तर्गत प्रत्येक दो माह पर आर्थिक नीतियों की समीक्षा करता है जिसमें रेपों दर और रिवर्स रेपों दर आदि तय किये जाते है। जिस दर पर वाणिज्यिक बैंक रिजर्व बैंक से ऋण प्राप्त करते है, उसे रेपो दर तथा जिस दर पर रि़जर्व बैंक वाणिज्यिक बैंको से ऋण लेता है, उसे रिवर्स रेपो दर कहा जाता है। यदि आरबीआई रेपों दर बढ़ाता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था में महगाई घटेगी वहीं रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाने से अर्थव्यवस्था में तरलता की कमी आयेगी इसके द्वारा मुद्रास्फीति में नियंत्रण होगा।

Explanations:

भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना RBI Act, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 2 अप्रैल, 1934 को हुई। 1 जनवरी, 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के अन्तर्गत प्रत्येक दो माह पर आर्थिक नीतियों की समीक्षा करता है जिसमें रेपों दर और रिवर्स रेपों दर आदि तय किये जाते है। जिस दर पर वाणिज्यिक बैंक रिजर्व बैंक से ऋण प्राप्त करते है, उसे रेपो दर तथा जिस दर पर रि़जर्व बैंक वाणिज्यिक बैंको से ऋण लेता है, उसे रिवर्स रेपो दर कहा जाता है। यदि आरबीआई रेपों दर बढ़ाता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था में महगाई घटेगी वहीं रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाने से अर्थव्यवस्था में तरलता की कमी आयेगी इसके द्वारा मुद्रास्फीति में नियंत्रण होगा।