search
Q: निम्नलिखित में से कौन सा काव्य–संग्रह नागार्जुन का नहीं है?
  • A. युग की गंगा
  • B. युगधारा
  • C. प्यासी–पथराई आँखें
  • D. तुमने कहा था
Correct Answer: Option A - ‘युग की गंगा’ काव्य-संग्रह नागार्जुन का नहीं है बल्कि यह रचना ‘केदारनाथ अग्रवाल’ की है। केदारनाथ अग्रवाल की अन्य रचनाएँ– नींद के बादल (1947), लोक और आलोक (1957), फूल नहीं रंग बोलते हैं (1965), आग का आईना (1970), गुलमेंहदी (1978), पंख और पतवार (1979), बंबई का रक्त स्नान (1983), हे मेरी तुम (1981), मार प्यार की थापे (1981), बोले बोल अबोल (1985)। नागार्जुन की प्रमुख रचनाएँ– युगधारा (1953), सतरंगे पंखों वाली (1959), प्यासी पथराई आँखें (1962), भस्मांकुर (1971), तालाब की मछलियाँ (1975), खिचड़ी विप्लव देखा हमने (1980), तुमने कहा था (1980), हजार-हजार बाँहो वाली (1981), पुरानी जूतियों का कोरस (1983), तालाब की मछलियाँ (1975)।
A. ‘युग की गंगा’ काव्य-संग्रह नागार्जुन का नहीं है बल्कि यह रचना ‘केदारनाथ अग्रवाल’ की है। केदारनाथ अग्रवाल की अन्य रचनाएँ– नींद के बादल (1947), लोक और आलोक (1957), फूल नहीं रंग बोलते हैं (1965), आग का आईना (1970), गुलमेंहदी (1978), पंख और पतवार (1979), बंबई का रक्त स्नान (1983), हे मेरी तुम (1981), मार प्यार की थापे (1981), बोले बोल अबोल (1985)। नागार्जुन की प्रमुख रचनाएँ– युगधारा (1953), सतरंगे पंखों वाली (1959), प्यासी पथराई आँखें (1962), भस्मांकुर (1971), तालाब की मछलियाँ (1975), खिचड़ी विप्लव देखा हमने (1980), तुमने कहा था (1980), हजार-हजार बाँहो वाली (1981), पुरानी जूतियों का कोरस (1983), तालाब की मछलियाँ (1975)।

Explanations:

‘युग की गंगा’ काव्य-संग्रह नागार्जुन का नहीं है बल्कि यह रचना ‘केदारनाथ अग्रवाल’ की है। केदारनाथ अग्रवाल की अन्य रचनाएँ– नींद के बादल (1947), लोक और आलोक (1957), फूल नहीं रंग बोलते हैं (1965), आग का आईना (1970), गुलमेंहदी (1978), पंख और पतवार (1979), बंबई का रक्त स्नान (1983), हे मेरी तुम (1981), मार प्यार की थापे (1981), बोले बोल अबोल (1985)। नागार्जुन की प्रमुख रचनाएँ– युगधारा (1953), सतरंगे पंखों वाली (1959), प्यासी पथराई आँखें (1962), भस्मांकुर (1971), तालाब की मछलियाँ (1975), खिचड़ी विप्लव देखा हमने (1980), तुमने कहा था (1980), हजार-हजार बाँहो वाली (1981), पुरानी जूतियों का कोरस (1983), तालाब की मछलियाँ (1975)।