Correct Answer:
Option B - संवेग वास्तव में व्यक्ति के आंतरिक भावों के अचानक तीव्र होने तथा विवेक प्रक्रिया के नियंत्रण से मुक्त व्यवहार के परिलक्षित होने की स्थिति को अभिव्यक्त करता है। मैक्डूगल ने कुल 14 प्रकार के संवेग बताये हैं जिनकी उत्पत्ति मूल प्रवृत्तियों से होती है। ये संवेग हैं– डर, क्रोध, घृणा, वात्सल्य, करूणा, कामुक्ता, आश्चर्य, आत्महीनता, आत्माभिमान, एकाकीपन, भूख, अधिकार, कृतिभाव, आमोद।
B. संवेग वास्तव में व्यक्ति के आंतरिक भावों के अचानक तीव्र होने तथा विवेक प्रक्रिया के नियंत्रण से मुक्त व्यवहार के परिलक्षित होने की स्थिति को अभिव्यक्त करता है। मैक्डूगल ने कुल 14 प्रकार के संवेग बताये हैं जिनकी उत्पत्ति मूल प्रवृत्तियों से होती है। ये संवेग हैं– डर, क्रोध, घृणा, वात्सल्य, करूणा, कामुक्ता, आश्चर्य, आत्महीनता, आत्माभिमान, एकाकीपन, भूख, अधिकार, कृतिभाव, आमोद।