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Q: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी राज्य के राज्यपाल के विरूद्ध उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी। 2. किसी राज्य के राज्यपाल की परिलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँँगे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1, न ही 2
Correct Answer: Option C - अनुच्छेद 202(3)क के अनुसार राज्यपाल की परिलब्धियाँ (वेतन) और भत्ते तथा उसके पद से सम्बन्धित अन्य व्यय राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of state) पर भारित होते हैं। अनु. 158 (3क) के अनुसार जब एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, वहाँ उस राज्यपाल को संदेय उपलब्धियाँ और भत्ते उन राज्यों के बीच ऐसे अनुपात में आवंटित किए जाएंगे जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे। राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी अनेक विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्राप्त हैं। उसे अपने शासकीय कृत्यों के लिए विधिक दायित्व से निजी उन्मुक्ति प्राप्त होती है। अपने कार्यकाल के दौरान उसे आपराधिक कार्यवाही की सुनवाई से उन्मुक्ति प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 158(4) में राज्यपाल की उपलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किये जायेंगे।
C. अनुच्छेद 202(3)क के अनुसार राज्यपाल की परिलब्धियाँ (वेतन) और भत्ते तथा उसके पद से सम्बन्धित अन्य व्यय राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of state) पर भारित होते हैं। अनु. 158 (3क) के अनुसार जब एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, वहाँ उस राज्यपाल को संदेय उपलब्धियाँ और भत्ते उन राज्यों के बीच ऐसे अनुपात में आवंटित किए जाएंगे जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे। राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी अनेक विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्राप्त हैं। उसे अपने शासकीय कृत्यों के लिए विधिक दायित्व से निजी उन्मुक्ति प्राप्त होती है। अपने कार्यकाल के दौरान उसे आपराधिक कार्यवाही की सुनवाई से उन्मुक्ति प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 158(4) में राज्यपाल की उपलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किये जायेंगे।

Explanations:

अनुच्छेद 202(3)क के अनुसार राज्यपाल की परिलब्धियाँ (वेतन) और भत्ते तथा उसके पद से सम्बन्धित अन्य व्यय राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of state) पर भारित होते हैं। अनु. 158 (3क) के अनुसार जब एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, वहाँ उस राज्यपाल को संदेय उपलब्धियाँ और भत्ते उन राज्यों के बीच ऐसे अनुपात में आवंटित किए जाएंगे जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अवधारित करे। राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी अनेक विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्राप्त हैं। उसे अपने शासकीय कृत्यों के लिए विधिक दायित्व से निजी उन्मुक्ति प्राप्त होती है। अपने कार्यकाल के दौरान उसे आपराधिक कार्यवाही की सुनवाई से उन्मुक्ति प्राप्त है। संविधान के अनुच्छेद 158(4) में राज्यपाल की उपलब्धियाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किये जायेंगे।