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Q: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए: (89-93) भारतीय साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता उसके मूल रूप में स्थित समन्वय की भावना है। उसकी यह विशेषता इतनी प्रमुख तथा मार्मिक है कि केवल इसी के बल पर संसार के अन्य साहित्यों के सामने वह अपनी मौलिकता की पताका फहरा सकता है। अपने स्वतंत्र अस्तित्व की सार्थकता प्रमाणित कर सकता है। जिस प्रकार धार्मिक क्षेत्र में भारत के ज्ञान, भक्ति तथा कर्म के समन्वय प्रसिद्ध हैं ठीक उसी प्रकार साहित्य तथा अन्य कलाओं में भी भारतीय प्रकृति समन्वय की ओर रही है। साहित्यिक समन्वय से हमारा तात्पर्य साहित्य में प्रदर्शित सुख-दु:ख, उत्थान-पतन, हर्ष-विषाद आदि विरोधी तथा विपरीत भावों के समीकरण तथा एक अलौकिक आनंद में उनके विलीन हो जाने में है। साहित्य के किसी अंग को लेकर देखिए, सर्वत्र यही समन्वय दिखाई देगा। धार्मिक क्षेत्र में निम्नलिखित में से किसके बीच समन्वय प्रसिद्ध है?
  • A. ज्ञान, कर्म और भक्ति
  • B. ज्ञान, कर्म अ‍ैर श्रद्धा
  • C. कर्म, भक्ति और श्रम
  • D. ज्ञान, कर्म और संगीत
Correct Answer: Option A - दिए गए गद्यांश के अनुसार भारतीय साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता उसके मूल में स्थित समन्वय की भावना है। इसी प्रकार धार्मिक क्षेत्र में भारत के ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों के बीच समन्वय प्रसिद्ध है।
A. दिए गए गद्यांश के अनुसार भारतीय साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता उसके मूल में स्थित समन्वय की भावना है। इसी प्रकार धार्मिक क्षेत्र में भारत के ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों के बीच समन्वय प्रसिद्ध है।

Explanations:

दिए गए गद्यांश के अनुसार भारतीय साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता उसके मूल में स्थित समन्वय की भावना है। इसी प्रकार धार्मिक क्षेत्र में भारत के ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों के बीच समन्वय प्रसिद्ध है।