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Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न (89-93) का सटीक उत्तर दीजिए: भाग्य कठिन परिश्रम का ही दूसरा नाम है। जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए सार्थक श्रम करना चाहिए। श्रम से जहाँ आत्मीय सुख और शांति मिलती है वहीं वह दूसरों को भी प्रसन्नता से भर देता है। विश्व में जो देश आगे बढ़े हैं, उनकी सफलता का रहस्य वहाँ के निवासियों का कठिन परिश्रम ही है। दूसरे विश्वयुद्ध में जब जापान पर एटम बम-गिराया गया तो उसका बहुत ही विनाश हुआ। किन्तु महायुद्ध के बाद जापान के नागरिकों ने रात-दिन कठिन श्रम किया और आज अपने देश को दुनिया के विकसित देशों की पंक्ति में आगे लाकर खड़ा कर दिया। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान के नागरिकों ने अपने देश के विकास के लिए क्या किया?
  • A. कंप्यूटर का विकास
  • B. हवाई जहाज का निर्माण
  • C. रात-दिन कठिन श्रम
  • D. काम और आराम
Correct Answer: Option C - दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के नागरिकों ने अपने देश के विकास के लिए रात-दिन कठिन श्रम किया। आज अपने देश को दुनिया के विकसित देशों की पंक्ति में आगे लाकर खड़ा कर दिया। अत: जापान के लोगों का श्रम ही है कि द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका से निकल कर विकसित राष्ट्र बना। आज तृतीय अर्थ व्यवस्थाओं में जापान को जाना जाता है।
C. दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के नागरिकों ने अपने देश के विकास के लिए रात-दिन कठिन श्रम किया। आज अपने देश को दुनिया के विकसित देशों की पंक्ति में आगे लाकर खड़ा कर दिया। अत: जापान के लोगों का श्रम ही है कि द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका से निकल कर विकसित राष्ट्र बना। आज तृतीय अर्थ व्यवस्थाओं में जापान को जाना जाता है।

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दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के नागरिकों ने अपने देश के विकास के लिए रात-दिन कठिन श्रम किया। आज अपने देश को दुनिया के विकसित देशों की पंक्ति में आगे लाकर खड़ा कर दिया। अत: जापान के लोगों का श्रम ही है कि द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका से निकल कर विकसित राष्ट्र बना। आज तृतीय अर्थ व्यवस्थाओं में जापान को जाना जाता है।