Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए (प्र. सं. 33-37) भारत प्राचीन संस्कृति का देश है। यहाँ दान-पुण्य को जीवन-मुक्ति का अनिवार्य अंग माना गया था। जब दान देने को धार्मिक कृत्य मान लिया गया तो निश्चित तौर पर दान लेने वाले भी होंगे। हमारे समाज में भिक्षावृत्ति की जिम्मेदारी समाज के धर्मात्मा, दयालु व सज्जन लोगों की है। भारतीय समाज में दान लेना व दान देना-दोनों धर्म के अंग माने गए हैं। पहले दान देने से पूर्व दान लेने वाले की पात्रता देखी जाती थी और योग्य पात्र को दान दिया जाता था। धर्मशास्रों ने दान की महिमा का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया। जिसके कारण भिक्षावृत्ति को भी धार्मिक मान्यता मिल गई। धीरे-धीरे दान-दाताओं ने पात्रता पर ध्यान देना बंद कर दिया और दयावश निरीह, अपाहिज और गरीबों को दान दिया जाने लगा। शनै:-शनै: समाज में और मूल्यों में बदलाव आया और अधिकतर लोग गरीबों, ब्राह्मणों और भिखारियों को दान का पात्र समझने लगे। समाज में जब इस प्रकार के परिवर्तन हुए तो धीरे-धीरे लोगों ने भिक्षा को अपनी जीविका ही बना लिया। गरीबी के कारण बेसहारा लोग भीख माँगने लगे। काम न मिलने से भी भिक्षावृत्ति को बल मिला और पूजा-स्थल, तीर्थ, रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, गली-मुहल्ले आदि स्थानों पर हर जगह भिखारी दिखाई देने शुरू हो गए। इस कार्य में हर आयु के व्यक्ति शामिल होने लग गए। साल-दो साल के दूध मुँहे बच्चे से लेकर अस्सी-नब्बे वर्ष के बूढ़े तक को भीख माँगते देखा जा सकता है। आज तो भीख माँगने का भी एक कलापूर्ण व्यवसाय बनता जा रहा है। कुछ खानदानी भिखारी होते हैं क्योंकि पुश्तों से उनके पूर्वज धर्मस्थानों पर अपना अड्डा जमाए हुए हैं। कुछ अपराधी बच्चों को उठा ले जाते है तथा उनसे भीख मँगवाते हैं। वे इतने निर्दय होते हैं कि भीख माँगने के लिए बच्चों का अंग-भंग भी कर देते हैं। कुछ भिखारी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं जो देश में छोटी-सी विपत्ति आ जाने पर भीख का कटोरा लेकर भ्रमण के लिए निकल जाते हैं। इसके अलावा अनेक श्रेणी के और भी भिखारी होते हैं। कुछ भिखारी परिस्थिति से बनते हैं तो कुछ बना दिए जाते हैं। कुछ शौकिया भी इस व्यवसाय में आ गए हैं। जन्मजात भिखारी अपने स्थान निश्चित रखते हैंै। कुछ भिखारी अपनी आमदनी वाली जगह दूसरे भिखारी को किराए पर देते हैं। बेरोजगारी और गरीबी के कारण कुछ वयोवृद्ध मजबूरीवश भिखारी बनते हैं। गरीबी के कारण बेसहारा लोग भीख माँगने लगते हैं। काम न मिलना भी भिक्षावृत्ति को जन्म देता है। कुछ अपराधी बाकायदा इस काम की ट्रेनिंग देते हैं। भीख रोकर, गाकर, आँखें दिखाकर या हँसकर भी माँगी जाती है। भीख माँगने के लिए इतना आवश्यक है कि दाता के मन में करुणा जगे। अपंगता, कुरूपता, अशक्तता, वृद्धावस्था आदि देखकर दाता करुणामय होकर भीख देने के लिए बाध्य हो जाता है। क्या भिक्षवृत्ति देश की एक समस्या नहीं है? गरीबों और निर्बलों को छोड़कर कई पढ़े-लिखे और हट्टे-कट्टे भी इस वृत्ति को अपनाए हुए हैं। क्या सरकार को इस दिशा में कुछ करने की आवश्यकता नहीं है? क्या हम लोग इन भिखारियों को करुणावश भीख दे रहे हैं? थोड़ा सोचिए, क्या हम भी इस वृत्ति को बढ़ावा तो नहीं दे रहे हैं। अगर दान ही करना है तो गरीबों को पुस्तकें, पाठ्य-सामग्री दें। गरीबों और बीमारों को दवाएँ और अस्पताल की सुविधाएँ दिलाएँ। इन लोगों को भीख के स्थान पर रोजगार की व्यवस्था कराएँ। नकद देना बंद करें। भीख माँगने वालों को खाना खिलाएँ पर कभी उन्हें नकद पैसे न दें। अगर जनता और सरकार दोनों मिलकर काम करें और भीख माँगने वालों को पुलिस के हवाले करना शुरू कर दें, तो इस पर काबू पाया जा सकता है। भीख न देकर भी दूसरों की मदद करने के लिए कौन सा विकल्प सही नहीं है?
A.
गरीबों और निर्बलों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की व्यवस्था करके मदद करना।
B.
पैसे देकर किसी भिखारी को रोजगार-धंधे के लिए प्रेरित करके मदद करना।
C.
गरीबों के बच्चों के स्कूल में फीस जमा करके और पुस्तकें और अन्य पाठ्य-सामग्री देकर मदद करना।
D.
रोगियों को चिकित्सा सुविधा दिलाकर तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से परिचित कराके मदद करना।
Correct Answer:
Option B - गद्यांश के अनुसार पैसे देकर किसी भिखारी को रोजगार-धंधे के लिए प्रेरित करके मदद करना। यह विकल्प भीख न देकर भी दूसरों की मदद करने के लिए सही विकल्प नहीं है।
अन्य सभी विकल्प संगत हैं।
B. गद्यांश के अनुसार पैसे देकर किसी भिखारी को रोजगार-धंधे के लिए प्रेरित करके मदद करना। यह विकल्प भीख न देकर भी दूसरों की मदद करने के लिए सही विकल्प नहीं है।
अन्य सभी विकल्प संगत हैं।
Explanations:
गद्यांश के अनुसार पैसे देकर किसी भिखारी को रोजगार-धंधे के लिए प्रेरित करके मदद करना। यह विकल्प भीख न देकर भी दूसरों की मदद करने के लिए सही विकल्प नहीं है।
अन्य सभी विकल्प संगत हैं।
Download Our App
Download our app to know more Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit.
Excepturi, esse.
YOU ARE NOT LOGIN
Unlocking possibilities: Login required for a world of personalized
experiences.