Correct Answer:
Option C - निम्नांकित काव्य प्रयोजनों में आचार्य मम्मर द्वारा प्रीति मान्य नहीं है। आचार्य मम्मट ने काव्य के छ: प्रयोजन बताए हैं जो निम्न हैं– काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतरक्षतये।
सद्य: परनिवृत्तये कान्तासम्मिततयोपदेशयुजे।। अर्थात्
(1) यश, (2) अर्थ, (3) व्यवहार, (4) अमङ्गल निवारण, (5) सद्य: परनिवृत्ति, (6) प्रियतमा के समान उपदेश देना।
C. निम्नांकित काव्य प्रयोजनों में आचार्य मम्मर द्वारा प्रीति मान्य नहीं है। आचार्य मम्मट ने काव्य के छ: प्रयोजन बताए हैं जो निम्न हैं– काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतरक्षतये।
सद्य: परनिवृत्तये कान्तासम्मिततयोपदेशयुजे।। अर्थात्
(1) यश, (2) अर्थ, (3) व्यवहार, (4) अमङ्गल निवारण, (5) सद्य: परनिवृत्ति, (6) प्रियतमा के समान उपदेश देना।