Correct Answer:
Option B - वजीर इमाद-उल-मुल्क द्वारा आलमगीर द्वितीय की हत्या के पश्चात् अलीगौहर ‘शाहआलम द्वितीय’ की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा। परंतु मुगल सम्राट इतना शक्तिहीन हो गया था कि वह 12 वर्षों बाद मराठों की सहायता से ही 1772 ई. में दिल्ली में प्रवेश कर सका। शाह आलम द्वितीय के दिल्ली से दूर रहने का कारण रुहेला सरदार नजीबुद्दौला उसके पुत्र जबीता खाँ और पोता गुलाम कादिर का खौफ था, गुलाम कादिर ने 1788 ई. में मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को अन्धा कर दिया था। साथ ही उत्तरवर्ती मुगल काल में उत्तर-पश्चिम सीमांत में विदेशी आक्रमण का भय सदा बना रहा जो नादिरशाह व अहमदशाह अब्दाली के रूप में समय-समय पर प्रकट भी हुआ। इस प्रकार कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।
B. वजीर इमाद-उल-मुल्क द्वारा आलमगीर द्वितीय की हत्या के पश्चात् अलीगौहर ‘शाहआलम द्वितीय’ की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा। परंतु मुगल सम्राट इतना शक्तिहीन हो गया था कि वह 12 वर्षों बाद मराठों की सहायता से ही 1772 ई. में दिल्ली में प्रवेश कर सका। शाह आलम द्वितीय के दिल्ली से दूर रहने का कारण रुहेला सरदार नजीबुद्दौला उसके पुत्र जबीता खाँ और पोता गुलाम कादिर का खौफ था, गुलाम कादिर ने 1788 ई. में मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को अन्धा कर दिया था। साथ ही उत्तरवर्ती मुगल काल में उत्तर-पश्चिम सीमांत में विदेशी आक्रमण का भय सदा बना रहा जो नादिरशाह व अहमदशाह अब्दाली के रूप में समय-समय पर प्रकट भी हुआ। इस प्रकार कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है।