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Q: निम्न में से कौन-सा विकास को प्रभावित करने वाला वातावरणीय कारक है?
  • A. वंशाणु
  • B. आनुवंशिकता
  • C. परिपक्वता
  • D. विद्यालय
Correct Answer: Option D - वातावरण के विकास पर पड़ने वाले प्रभाव के सम्बन्ध में एक तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वातावरण मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास में अपना कोई मौलिक योगदान नहीं करता बल्कि जो गुण और विशेषताएँ उसे आनुवांशिकता से प्राप्त होती हैं उनका पूर्ण विकास करने में यह बहुत अधिक सहायक होता है। इन वातावरणीय कारकों में विद्यालय काफी महत्वपूर्ण योगदान निभाता है। बालक के विकास में विद्यालय के वातावरण अध्यापक तथा शिक्षा के साधनों की निर्णायक भूमिका होता है। जिन विद्यालयों में कक्षा शिक्षण के साथ-साथ सहगामी क्रियाओं का आयोजन किया जाता हैं, वहाँ बालकों को अपनी प्रतिभा के विकास के अवसर मिलते हैं। जिन विद्यालयों में बालकों के लिए निर्देशन परामर्श सेवाएँ एवं स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होती हैं, वहाँ के बालकों को अपनी समस्याओं का समाधान खोजने में सहायता मिलती है। अध्यापकों का व्यवहार भी बालकों के विकास पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालता है।
D. वातावरण के विकास पर पड़ने वाले प्रभाव के सम्बन्ध में एक तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वातावरण मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास में अपना कोई मौलिक योगदान नहीं करता बल्कि जो गुण और विशेषताएँ उसे आनुवांशिकता से प्राप्त होती हैं उनका पूर्ण विकास करने में यह बहुत अधिक सहायक होता है। इन वातावरणीय कारकों में विद्यालय काफी महत्वपूर्ण योगदान निभाता है। बालक के विकास में विद्यालय के वातावरण अध्यापक तथा शिक्षा के साधनों की निर्णायक भूमिका होता है। जिन विद्यालयों में कक्षा शिक्षण के साथ-साथ सहगामी क्रियाओं का आयोजन किया जाता हैं, वहाँ बालकों को अपनी प्रतिभा के विकास के अवसर मिलते हैं। जिन विद्यालयों में बालकों के लिए निर्देशन परामर्श सेवाएँ एवं स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होती हैं, वहाँ के बालकों को अपनी समस्याओं का समाधान खोजने में सहायता मिलती है। अध्यापकों का व्यवहार भी बालकों के विकास पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालता है।

Explanations:

वातावरण के विकास पर पड़ने वाले प्रभाव के सम्बन्ध में एक तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वातावरण मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास में अपना कोई मौलिक योगदान नहीं करता बल्कि जो गुण और विशेषताएँ उसे आनुवांशिकता से प्राप्त होती हैं उनका पूर्ण विकास करने में यह बहुत अधिक सहायक होता है। इन वातावरणीय कारकों में विद्यालय काफी महत्वपूर्ण योगदान निभाता है। बालक के विकास में विद्यालय के वातावरण अध्यापक तथा शिक्षा के साधनों की निर्णायक भूमिका होता है। जिन विद्यालयों में कक्षा शिक्षण के साथ-साथ सहगामी क्रियाओं का आयोजन किया जाता हैं, वहाँ बालकों को अपनी प्रतिभा के विकास के अवसर मिलते हैं। जिन विद्यालयों में बालकों के लिए निर्देशन परामर्श सेवाएँ एवं स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध होती हैं, वहाँ के बालकों को अपनी समस्याओं का समाधान खोजने में सहायता मिलती है। अध्यापकों का व्यवहार भी बालकों के विकास पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालता है।