Correct Answer:
Option C - बिहारी रीतिकाल के रीतिसिद्ध काव्य धारा के कवि हैं। ‘बिहारी सतसई’ (719 दोहे) इनके द्वारा रचित एक मुक्तक ग्रन्थ है। रीतिकाल/उत्तर मध्य काल (1650–1850 ई.)–को मिश्र बंधु ने ‘अलंकृत काल’, रामचन्द्र शुक्ल ने ‘रीतिकाल’ तथा विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने ‘शृंगार काल’ कहा है। इस काल के प्रमुख कवि– बिहारी, भूषण, घनानन्द, भिखारीदास, मतिराम, चिंतामणि, दलपति राय आदि हैं। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला तथा सुमित्रानन्दन पंत छायावादी कवि हैं।
C. बिहारी रीतिकाल के रीतिसिद्ध काव्य धारा के कवि हैं। ‘बिहारी सतसई’ (719 दोहे) इनके द्वारा रचित एक मुक्तक ग्रन्थ है। रीतिकाल/उत्तर मध्य काल (1650–1850 ई.)–को मिश्र बंधु ने ‘अलंकृत काल’, रामचन्द्र शुक्ल ने ‘रीतिकाल’ तथा विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने ‘शृंगार काल’ कहा है। इस काल के प्रमुख कवि– बिहारी, भूषण, घनानन्द, भिखारीदास, मतिराम, चिंतामणि, दलपति राय आदि हैं। जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला तथा सुमित्रानन्दन पंत छायावादी कवि हैं।