Correct Answer:
Option D - मध्य–शीतक के रूप में वायु व जल दोनों प्रकार के शीतक का प्रयोग किया जा सकता है।
मध्य शीतक का कार्य होता है संपीडित वायु की उष्मा को ग्रहण करना। अत: जब यह उष्मा वायु के द्वारा ग्रहण की जाती है तब इसे वायु–प्रशीतक तथा जब जल द्वारा अवशोषित की जाए तब जल प्रशीतक प्रणाली कहलाती है। लेकिन वायु प्रशीतक के अपेक्षा जल प्रशीतक ज्यादा उचित समझा जाता है क्योंकि जल द्वारा अधिक उष्मा ग्रहण किया जा सकता है।
D. मध्य–शीतक के रूप में वायु व जल दोनों प्रकार के शीतक का प्रयोग किया जा सकता है।
मध्य शीतक का कार्य होता है संपीडित वायु की उष्मा को ग्रहण करना। अत: जब यह उष्मा वायु के द्वारा ग्रहण की जाती है तब इसे वायु–प्रशीतक तथा जब जल द्वारा अवशोषित की जाए तब जल प्रशीतक प्रणाली कहलाती है। लेकिन वायु प्रशीतक के अपेक्षा जल प्रशीतक ज्यादा उचित समझा जाता है क्योंकि जल द्वारा अधिक उष्मा ग्रहण किया जा सकता है।