Correct Answer:
Option B - नलचम्पूकाव्यानुसारं ‘प्रसन्ना: कान्तिहारिण्यो नानाश्लेषविचक्षणा वाच: मुखे गृहे स्त्रिय: ‘पुण्यै:’ कारणात् भवन्ति।
अर्थात् नलचम्पूकाव्यानुसार (वाणी पक्ष में) प्रसादगुणयुक्त ओज्ज्वल्यरूप कान्ति गुण के कारण मनोहर तथा अनेक प्रकार के श्लेषालंकारों को प्रकट करने वाली वाणियाँ, (स्त्री पक्ष में) तथा सदा प्रसन्न रखने वाले, कान्ति (सौन्दर्य) से मनोहर, अनेक प्रकार के आलिंगन में निपुण रमणियाँ घर में पुण्यों के कारण होती हैं–
प्रसन्ना:कान्तिहारिण्यो नानाश्लेषविचक्षणा:।
भवन्ति कस्यचित्पुण्यैर्मुखे वाचो गृहे स्त्रिय:।।4।।
अत: प्रश्नानुसार विकल्प (b) सही है शेष अन्य विकल्प गलत हैं।
B. नलचम्पूकाव्यानुसारं ‘प्रसन्ना: कान्तिहारिण्यो नानाश्लेषविचक्षणा वाच: मुखे गृहे स्त्रिय: ‘पुण्यै:’ कारणात् भवन्ति।
अर्थात् नलचम्पूकाव्यानुसार (वाणी पक्ष में) प्रसादगुणयुक्त ओज्ज्वल्यरूप कान्ति गुण के कारण मनोहर तथा अनेक प्रकार के श्लेषालंकारों को प्रकट करने वाली वाणियाँ, (स्त्री पक्ष में) तथा सदा प्रसन्न रखने वाले, कान्ति (सौन्दर्य) से मनोहर, अनेक प्रकार के आलिंगन में निपुण रमणियाँ घर में पुण्यों के कारण होती हैं–
प्रसन्ना:कान्तिहारिण्यो नानाश्लेषविचक्षणा:।
भवन्ति कस्यचित्पुण्यैर्मुखे वाचो गृहे स्त्रिय:।।4।।
अत: प्रश्नानुसार विकल्प (b) सही है शेष अन्य विकल्प गलत हैं।