Correct Answer:
Option D - रूपचित्रकारी (पोट्रैट पेंटिंग) को प्राचीन भारतीय इतिहास के शिक्षण के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है।
यदि आपको प्राचीन इतिहास से परिचित कराना है, तो निम्नलिखित स्रोतों का उपयोग करना सही होगा–
* गुफाओं की चित्रकारी
* शिलालेख
* पांडुलिपियाँ
* लघु आकारी चित्रकारी
* अभिलेख
प्राचीन भारतीय इतिहास भारतीय प्रागैतिहास से शुरू होता है, जिनमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर शास्त्रीय काल तक का इतिहास शामिल है।
D. रूपचित्रकारी (पोट्रैट पेंटिंग) को प्राचीन भारतीय इतिहास के शिक्षण के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है।
यदि आपको प्राचीन इतिहास से परिचित कराना है, तो निम्नलिखित स्रोतों का उपयोग करना सही होगा–
* गुफाओं की चित्रकारी
* शिलालेख
* पांडुलिपियाँ
* लघु आकारी चित्रकारी
* अभिलेख
प्राचीन भारतीय इतिहास भारतीय प्रागैतिहास से शुरू होता है, जिनमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर शास्त्रीय काल तक का इतिहास शामिल है।