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Q: ‘नई कविता की प्रमुख प्रवृत्ति है’
  • A. बौद्धिकता का प्राधान्य
  • B. यथार्थवाद का अति आग्रह
  • C. कुण्ठा, निराशा, संदेह की अभिव्यक्ति
  • D. उपर्युक्त सभी
Correct Answer: Option D - बौद्धिकता का प्राधान्य, यथार्थवाद का अति आग्रह, कुण्ठा, निराशा, संदेह की अभिव्यक्ति सभी नई कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं। 1954 में जगदीश गुप्त की ‘नयी कविता’ शीर्षक पत्रिका के प्रकाशन से इसकी शुरूआत मानी जाती है। इसके प्रमुख सूत्रधार हैं– जगदीश गुप्त, विजयदेव नारायण साही, धर्मवीर भारती, डॉ. रघुवंश, रामस्वरूप चतुर्वेदी और लक्ष्मीकान्त वर्मा आदि। धर्मवीर भारती का कथन है– ‘‘पुराने नये मूल्यों के टकराव से उत्पन्न तनाव की कविता है।’’
D. बौद्धिकता का प्राधान्य, यथार्थवाद का अति आग्रह, कुण्ठा, निराशा, संदेह की अभिव्यक्ति सभी नई कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं। 1954 में जगदीश गुप्त की ‘नयी कविता’ शीर्षक पत्रिका के प्रकाशन से इसकी शुरूआत मानी जाती है। इसके प्रमुख सूत्रधार हैं– जगदीश गुप्त, विजयदेव नारायण साही, धर्मवीर भारती, डॉ. रघुवंश, रामस्वरूप चतुर्वेदी और लक्ष्मीकान्त वर्मा आदि। धर्मवीर भारती का कथन है– ‘‘पुराने नये मूल्यों के टकराव से उत्पन्न तनाव की कविता है।’’

Explanations:

बौद्धिकता का प्राधान्य, यथार्थवाद का अति आग्रह, कुण्ठा, निराशा, संदेह की अभिव्यक्ति सभी नई कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं। 1954 में जगदीश गुप्त की ‘नयी कविता’ शीर्षक पत्रिका के प्रकाशन से इसकी शुरूआत मानी जाती है। इसके प्रमुख सूत्रधार हैं– जगदीश गुप्त, विजयदेव नारायण साही, धर्मवीर भारती, डॉ. रघुवंश, रामस्वरूप चतुर्वेदी और लक्ष्मीकान्त वर्मा आदि। धर्मवीर भारती का कथन है– ‘‘पुराने नये मूल्यों के टकराव से उत्पन्न तनाव की कविता है।’’