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Q: Method of applying water directly to the root zone of the plant is called .......... पौधे के जड़ क्षेत्र में सीधे पानी देने की पद्धति .......... कहलाती है।
  • A. check flooding/चेक फ्लडिंग
  • B. drip method/ड्रिप विधि
  • C. furrow method/कुंड विधि
  • D. sprinkle irrigation/फव्वारा सिंचाई
Correct Answer: Option B - ड्रिप सिंचाई प्रणाली फसल को मुख्यत: पंक्ति उपपंक्ति तथा पाश्र्व पंक्ति के तंत्र के उनकी लम्बाइयों के अन्तराल के साथ उत्सर्जन बिन्दु का उपयोग करके पानी वितरित करती है। इसमें पौधों की वृद्धि के लिए पानी व आवश्यक पदार्थों को सीधे जड़ों में आर्पूित की जाती है। ड्रिप सिंचाई से पैदावार में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि तथा बाढ़ सिंचाई की तुलना में 70 प्रतिशत कम पानी की आवश्यकता पड़ती है। जब खेत लहरदार हो तथा फसल उथली जड़ वाली हो और पानी की मात्रा सीमित हो, तो छिड़काव सिंचाई (Sprinkar Irrigation) अपनाते हैं।
B. ड्रिप सिंचाई प्रणाली फसल को मुख्यत: पंक्ति उपपंक्ति तथा पाश्र्व पंक्ति के तंत्र के उनकी लम्बाइयों के अन्तराल के साथ उत्सर्जन बिन्दु का उपयोग करके पानी वितरित करती है। इसमें पौधों की वृद्धि के लिए पानी व आवश्यक पदार्थों को सीधे जड़ों में आर्पूित की जाती है। ड्रिप सिंचाई से पैदावार में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि तथा बाढ़ सिंचाई की तुलना में 70 प्रतिशत कम पानी की आवश्यकता पड़ती है। जब खेत लहरदार हो तथा फसल उथली जड़ वाली हो और पानी की मात्रा सीमित हो, तो छिड़काव सिंचाई (Sprinkar Irrigation) अपनाते हैं।

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ड्रिप सिंचाई प्रणाली फसल को मुख्यत: पंक्ति उपपंक्ति तथा पाश्र्व पंक्ति के तंत्र के उनकी लम्बाइयों के अन्तराल के साथ उत्सर्जन बिन्दु का उपयोग करके पानी वितरित करती है। इसमें पौधों की वृद्धि के लिए पानी व आवश्यक पदार्थों को सीधे जड़ों में आर्पूित की जाती है। ड्रिप सिंचाई से पैदावार में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि तथा बाढ़ सिंचाई की तुलना में 70 प्रतिशत कम पानी की आवश्यकता पड़ती है। जब खेत लहरदार हो तथा फसल उथली जड़ वाली हो और पानी की मात्रा सीमित हो, तो छिड़काव सिंचाई (Sprinkar Irrigation) अपनाते हैं।