Correct Answer:
Option A - बलबन दिल्ली सल्तनत का पहला शासक था जिसने सुल्तान के पद और अधिकारों के बारे में विस्तृत रूप से विचार प्रकट किये। बलबन के राजत्व का सिद्धांत प्रतिष्ठा, शक्ति और न्याय पर आधारित था। बलबन के राजत्व के सिद्धांत की दो मुख्य विशेषताएँ थीं प्रथम सुल्तान का पद ईश्वर के द्वारा प्रदान किया हुआ होता है और द्वितीय सुल्तान का निरंकुश होना आवश्यक है। उसके अनुसार सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि (नाइब-ए-खुदाई) माना है और बलबन ने जिल्ले इलाही की उपाधि धारण की। बलबन इस बात पर बल देता था कि सुल्तान में ईश्वर की शक्ति निहित होती है, इसलिए उसके कार्यों की सार्वजनिक जाँच नहीं हो सकती है।
A. बलबन दिल्ली सल्तनत का पहला शासक था जिसने सुल्तान के पद और अधिकारों के बारे में विस्तृत रूप से विचार प्रकट किये। बलबन के राजत्व का सिद्धांत प्रतिष्ठा, शक्ति और न्याय पर आधारित था। बलबन के राजत्व के सिद्धांत की दो मुख्य विशेषताएँ थीं प्रथम सुल्तान का पद ईश्वर के द्वारा प्रदान किया हुआ होता है और द्वितीय सुल्तान का निरंकुश होना आवश्यक है। उसके अनुसार सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि (नाइब-ए-खुदाई) माना है और बलबन ने जिल्ले इलाही की उपाधि धारण की। बलबन इस बात पर बल देता था कि सुल्तान में ईश्वर की शक्ति निहित होती है, इसलिए उसके कार्यों की सार्वजनिक जाँच नहीं हो सकती है।