Correct Answer:
Option B - ‘न बाधतेऽस्य त्रिगण: परस्परम्’ सूक्ति किरातार्जुनीयम् में उद्धृत है। इसका अर्थ है इस (दुर्योधन) के तीनों पुरुषार्थ गुणों में अनुराग के कारण मित्रता को प्राप्त हुये के समान एक दूसरे को कभी बाधित नहीं करते हैं।
B. ‘न बाधतेऽस्य त्रिगण: परस्परम्’ सूक्ति किरातार्जुनीयम् में उद्धृत है। इसका अर्थ है इस (दुर्योधन) के तीनों पुरुषार्थ गुणों में अनुराग के कारण मित्रता को प्राप्त हुये के समान एक दूसरे को कभी बाधित नहीं करते हैं।