Correct Answer:
Option A - अधिकांश एसी जनरेटर को उनके कॉम्पैक्ट आकार के कारण त्रिफेज एसी जनरेटर के रूप में डिजाइन किया जाता है। जब रोटर को स्लिप रिंगों द्वारा डी.सी. सप्लाई देकर, आद्यचालक द्वारा घुमाया जाता है, तो रोटर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पोल से उत्पन्न फ्लक्स चालको द्वारा कट जाते है, इससे स्टेटर की आर्मेचर वाइंडिंग में गतिकीय प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, यही प्रत्यावर्तक द्वारा उत्पन्न ए.सी. वोल्टेज होता है जिसे स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर द्वारा उच्च वोल्टता में परिवर्तित कर प्रेषण लाइनों की सहायता से दूर-दूर तक प्रेषित किया जाता है।
A. अधिकांश एसी जनरेटर को उनके कॉम्पैक्ट आकार के कारण त्रिफेज एसी जनरेटर के रूप में डिजाइन किया जाता है। जब रोटर को स्लिप रिंगों द्वारा डी.सी. सप्लाई देकर, आद्यचालक द्वारा घुमाया जाता है, तो रोटर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पोल से उत्पन्न फ्लक्स चालको द्वारा कट जाते है, इससे स्टेटर की आर्मेचर वाइंडिंग में गतिकीय प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, यही प्रत्यावर्तक द्वारा उत्पन्न ए.सी. वोल्टेज होता है जिसे स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर द्वारा उच्च वोल्टता में परिवर्तित कर प्रेषण लाइनों की सहायता से दूर-दूर तक प्रेषित किया जाता है।