Correct Answer:
Option C - दिल्ली सल्तनत के गुलामवंशी शासक इल्तुतमिश के शासनकाल (1211 ई.) में मंगोल शासक चंगेज खान उर्फ तैमूजिन ने गोबी के रेगिस्तान के समस्त बर्बर जातियों को अपने नेतृत्व में संगठित कर चीन, तुर्किस्तान, मध्य एशिया व पर्शिया को हरा कर उसने पर्शिया (ईरान) के शासक जलालुद्दीन मुहम्मद ख्वारिज्म शाह का सम्पूर्ण साम्राज्य नष्ट कर दिया और वह ख्वारिज्म के अंतिम शाह जलालुद्दीन मंगबर्ना का पीछा करते हुये सिन्ध तक आ पहुँचा। किन्तु इल्तुतमिश ने जलालुद्दीन को शरण देने से इन्कार कर दिया, जिस कारण चंगेंज खान के आक्रमण से नवोदित तुर्की राज्य बच गया। ध्यातव्य है कि खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) के शासन काल में सर्वाधिक मंगोल आक्रमण हुये।
C. दिल्ली सल्तनत के गुलामवंशी शासक इल्तुतमिश के शासनकाल (1211 ई.) में मंगोल शासक चंगेज खान उर्फ तैमूजिन ने गोबी के रेगिस्तान के समस्त बर्बर जातियों को अपने नेतृत्व में संगठित कर चीन, तुर्किस्तान, मध्य एशिया व पर्शिया को हरा कर उसने पर्शिया (ईरान) के शासक जलालुद्दीन मुहम्मद ख्वारिज्म शाह का सम्पूर्ण साम्राज्य नष्ट कर दिया और वह ख्वारिज्म के अंतिम शाह जलालुद्दीन मंगबर्ना का पीछा करते हुये सिन्ध तक आ पहुँचा। किन्तु इल्तुतमिश ने जलालुद्दीन को शरण देने से इन्कार कर दिया, जिस कारण चंगेंज खान के आक्रमण से नवोदित तुर्की राज्य बच गया। ध्यातव्य है कि खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) के शासन काल में सर्वाधिक मंगोल आक्रमण हुये।