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Q: ‘मदनाष्टक’ इनमें से किसकी रचना है?
  • A. नंददास
  • B. गंग
  • C. ध्रुवदास
  • D. रहीम दास
Correct Answer: Option D - ‘मदनाष्टक’ रहीमदास की रचना है। ‘मदनाष्टक’ संस्कृत और खड़ी बोली हिन्दी की मिश्रित शैली में रचित कृति है। इसका वण्र्य-विषय ‘भगवान श्री कृष्ण’ की रासलीला है। इस कृति में ‘मालिनी छंद’ का प्रयोग किया गया है। कवि गंग का वास्तविक नाम गंगाधर था। ये अकबर के दरबारी कवि थे। गंग पचीसी, गंग पदावली तथा गंगरत्नावली इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। रहीमदास की अन्य रचनाएँ– दोहावली या सतसई, बरवै नायिका भेद, नगर शोभा, मदनाष्टक, खेल कौतुकम्, शृंगार सोरठा, रास पंचाध्यायी। नंददास की रचनाएँ– अनेकार्थ मंजरी, मानमंजरी, सुदामा चरित, रसमंजरी, रूपमंजरी, विरहमंजरी, प्रेमबारह खड़ी, श्यामसगाई, रुक्मिणी मंगल, भँवर गीत, रासपंचाध्यायी, सिद्धांत पंचाध्यायी, दशमस्कन्ध भाषा। ध्रुवदास की रचनाएँ– जीवदशा लीला, मन शृंगारलीला, रसविहार लीला।
D. ‘मदनाष्टक’ रहीमदास की रचना है। ‘मदनाष्टक’ संस्कृत और खड़ी बोली हिन्दी की मिश्रित शैली में रचित कृति है। इसका वण्र्य-विषय ‘भगवान श्री कृष्ण’ की रासलीला है। इस कृति में ‘मालिनी छंद’ का प्रयोग किया गया है। कवि गंग का वास्तविक नाम गंगाधर था। ये अकबर के दरबारी कवि थे। गंग पचीसी, गंग पदावली तथा गंगरत्नावली इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। रहीमदास की अन्य रचनाएँ– दोहावली या सतसई, बरवै नायिका भेद, नगर शोभा, मदनाष्टक, खेल कौतुकम्, शृंगार सोरठा, रास पंचाध्यायी। नंददास की रचनाएँ– अनेकार्थ मंजरी, मानमंजरी, सुदामा चरित, रसमंजरी, रूपमंजरी, विरहमंजरी, प्रेमबारह खड़ी, श्यामसगाई, रुक्मिणी मंगल, भँवर गीत, रासपंचाध्यायी, सिद्धांत पंचाध्यायी, दशमस्कन्ध भाषा। ध्रुवदास की रचनाएँ– जीवदशा लीला, मन शृंगारलीला, रसविहार लीला।

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‘मदनाष्टक’ रहीमदास की रचना है। ‘मदनाष्टक’ संस्कृत और खड़ी बोली हिन्दी की मिश्रित शैली में रचित कृति है। इसका वण्र्य-विषय ‘भगवान श्री कृष्ण’ की रासलीला है। इस कृति में ‘मालिनी छंद’ का प्रयोग किया गया है। कवि गंग का वास्तविक नाम गंगाधर था। ये अकबर के दरबारी कवि थे। गंग पचीसी, गंग पदावली तथा गंगरत्नावली इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। रहीमदास की अन्य रचनाएँ– दोहावली या सतसई, बरवै नायिका भेद, नगर शोभा, मदनाष्टक, खेल कौतुकम्, शृंगार सोरठा, रास पंचाध्यायी। नंददास की रचनाएँ– अनेकार्थ मंजरी, मानमंजरी, सुदामा चरित, रसमंजरी, रूपमंजरी, विरहमंजरी, प्रेमबारह खड़ी, श्यामसगाई, रुक्मिणी मंगल, भँवर गीत, रासपंचाध्यायी, सिद्धांत पंचाध्यायी, दशमस्कन्ध भाषा। ध्रुवदास की रचनाएँ– जीवदशा लीला, मन शृंगारलीला, रसविहार लीला।