Correct Answer:
Option A - धागा तैयार करने हेतु जिस कच्ची सामग्री अथवा रेशा (Raw material of fibers) का प्रयोग किया जाता है उस कच्ची सामग्री तथा तैयार धागे की लम्बाई व वजन में एक निश्चित सम्बन्ध होता है। इन्ही सम्बन्धों के आधार पर धागे की लम्बाई, मोटाई, व्यास, बारीकी आदि मालूम की जाती है। इसके लिए धागों को अंकों द्वारा मापा जाता है, जिसे ही सूचक अंक (Count yarn) कहते हैं, इन्हीं सूचक अंको के आधार पर धागों की मोटाई और आकार का अनुमान लगाया जाता है। साथ ही धागे की कोमलता, बारीकी, चिकनापन अथवा खुरदरापन का ज्ञान होता। अत: विकल्प (a) सही है।
A. धागा तैयार करने हेतु जिस कच्ची सामग्री अथवा रेशा (Raw material of fibers) का प्रयोग किया जाता है उस कच्ची सामग्री तथा तैयार धागे की लम्बाई व वजन में एक निश्चित सम्बन्ध होता है। इन्ही सम्बन्धों के आधार पर धागे की लम्बाई, मोटाई, व्यास, बारीकी आदि मालूम की जाती है। इसके लिए धागों को अंकों द्वारा मापा जाता है, जिसे ही सूचक अंक (Count yarn) कहते हैं, इन्हीं सूचक अंको के आधार पर धागों की मोटाई और आकार का अनुमान लगाया जाता है। साथ ही धागे की कोमलता, बारीकी, चिकनापन अथवा खुरदरापन का ज्ञान होता। अत: विकल्प (a) सही है।