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Q: मौर्यों के समय कण्टक शोधक न्यायालय का न्यायाधीश किस नाम से जाना जाता था?
  • A. मुख्य न्यायाधीश
  • B. धर्मस्थ
  • C. पौर व्यावाहारिक
  • D. प्रदेष्टा
Correct Answer: Option D - मौर्य काल में दो प्रकार के न्यायालय थे- 1- धर्मस्थयीय (दीवानी) न्यायालय– इसका न्यायाधीश व्यवहारिक था। 2- कण्टक शोधन (फौजदारी) न्यायालय - इसका न्यायाधीश ‘प्रदेष्टा’ था। इन न्यायालयों में तीन-तीन न्यायाधीश बैठते थे। विदेशी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष प्रकार के न्यायालय का गठन किया जाता था।
D. मौर्य काल में दो प्रकार के न्यायालय थे- 1- धर्मस्थयीय (दीवानी) न्यायालय– इसका न्यायाधीश व्यवहारिक था। 2- कण्टक शोधन (फौजदारी) न्यायालय - इसका न्यायाधीश ‘प्रदेष्टा’ था। इन न्यायालयों में तीन-तीन न्यायाधीश बैठते थे। विदेशी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष प्रकार के न्यायालय का गठन किया जाता था।

Explanations:

मौर्य काल में दो प्रकार के न्यायालय थे- 1- धर्मस्थयीय (दीवानी) न्यायालय– इसका न्यायाधीश व्यवहारिक था। 2- कण्टक शोधन (फौजदारी) न्यायालय - इसका न्यायाधीश ‘प्रदेष्टा’ था। इन न्यायालयों में तीन-तीन न्यायाधीश बैठते थे। विदेशी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष प्रकार के न्यायालय का गठन किया जाता था।