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Q: मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोय। जा तन की झाँईं परै, स्याम हरित दुति होय।। उपर्युक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है?
  • A. अन्योक्ति
  • B. यमक
  • C. श्लेष
  • D. रूपक
Correct Answer: Option C - c और d दोनों ही सही उत्तर हैं। बिहारी का यह दोहा ‘श्लेष’ और ‘रुपक’ अलंकार का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। ‘श्लेष अलंकार’ के अन्तर्गत शब्द का एक ही अर्थ होता है जो दो या दो से अधिक पक्षों में लागू होता है तथा उनके पर्यायवाची शब्दों के प्रयुक्त होने पर भी ये अर्थ अपरिवर्तित रहते हैं, जैसे- यहाँ पर बिहारी राधा की वन्दना करते हुए उनसे अपनी सांसारिक बाधाओं के निवारण की प्रार्थना कर रहे हैं साथ ही में राधा की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे नगरों में विचरने वाली कृष्ण की प्रिय राधा! तुम मेरी सभी सांसारिक कठिनाइयों का नाश करो, क्योंकि तुम्हारी केवल परछाईं की छाया मात्र से ही श्याम की छवि हरित हो उठती है अर्थात वे उमंग के सागर में डूब जाते हैं। दूसरे अर्थ के सन्दर्भ में राधा के स्मरण मात्र से ही व्यक्ति को प्रेमाध्यात्म का विराट वातावरण उपलब्ध होता है जहाँ वह मोक्ष रूपी आनन्द में डूब जाता है।
C. c और d दोनों ही सही उत्तर हैं। बिहारी का यह दोहा ‘श्लेष’ और ‘रुपक’ अलंकार का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। ‘श्लेष अलंकार’ के अन्तर्गत शब्द का एक ही अर्थ होता है जो दो या दो से अधिक पक्षों में लागू होता है तथा उनके पर्यायवाची शब्दों के प्रयुक्त होने पर भी ये अर्थ अपरिवर्तित रहते हैं, जैसे- यहाँ पर बिहारी राधा की वन्दना करते हुए उनसे अपनी सांसारिक बाधाओं के निवारण की प्रार्थना कर रहे हैं साथ ही में राधा की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे नगरों में विचरने वाली कृष्ण की प्रिय राधा! तुम मेरी सभी सांसारिक कठिनाइयों का नाश करो, क्योंकि तुम्हारी केवल परछाईं की छाया मात्र से ही श्याम की छवि हरित हो उठती है अर्थात वे उमंग के सागर में डूब जाते हैं। दूसरे अर्थ के सन्दर्भ में राधा के स्मरण मात्र से ही व्यक्ति को प्रेमाध्यात्म का विराट वातावरण उपलब्ध होता है जहाँ वह मोक्ष रूपी आनन्द में डूब जाता है।

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c और d दोनों ही सही उत्तर हैं। बिहारी का यह दोहा ‘श्लेष’ और ‘रुपक’ अलंकार का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। ‘श्लेष अलंकार’ के अन्तर्गत शब्द का एक ही अर्थ होता है जो दो या दो से अधिक पक्षों में लागू होता है तथा उनके पर्यायवाची शब्दों के प्रयुक्त होने पर भी ये अर्थ अपरिवर्तित रहते हैं, जैसे- यहाँ पर बिहारी राधा की वन्दना करते हुए उनसे अपनी सांसारिक बाधाओं के निवारण की प्रार्थना कर रहे हैं साथ ही में राधा की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे नगरों में विचरने वाली कृष्ण की प्रिय राधा! तुम मेरी सभी सांसारिक कठिनाइयों का नाश करो, क्योंकि तुम्हारी केवल परछाईं की छाया मात्र से ही श्याम की छवि हरित हो उठती है अर्थात वे उमंग के सागर में डूब जाते हैं। दूसरे अर्थ के सन्दर्भ में राधा के स्मरण मात्र से ही व्यक्ति को प्रेमाध्यात्म का विराट वातावरण उपलब्ध होता है जहाँ वह मोक्ष रूपी आनन्द में डूब जाता है।