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Q: ‘‘मखशतपरिपूतं गोत्रमुद्भासितं यद्’’ यह कथन है
  • A. शर्विलक का
  • B. शकार का
  • C. चारुदत्त का
  • D. विदूषक का
Correct Answer: Option C - ‘‘मखशतपरिपूतं गोत्रमुद्भासितं यद्’’ यह कथन चारुदत्त का है। ‘‘मखशतपरिपूतं गोत्रमुद्भासितं मे सदसि निविऽचैत्यब्रह्मघोषै: पुरस्तात् । मम मरणदशायां वर्तमानस्य पापै स्तदसदृशमनुष्यौर्घुष्यते घोषणायाम् ।। अर्थात् - सैकड़ों यज्ञों से पवित्र जो मेरा वंश पूर्वकाल की सभाओं में जनाकीर्ण यज्ञशाला की वेदध्वनियों से प्रकाशित हुआ था वहीं मेरे मरणावस्था में विद्यमान होने पर इन पापी तथा अयोग्य जनों के द्वारा (अपराध) घोषणा स्थल में घोषित किया जा रहा है।
C. ‘‘मखशतपरिपूतं गोत्रमुद्भासितं यद्’’ यह कथन चारुदत्त का है। ‘‘मखशतपरिपूतं गोत्रमुद्भासितं मे सदसि निविऽचैत्यब्रह्मघोषै: पुरस्तात् । मम मरणदशायां वर्तमानस्य पापै स्तदसदृशमनुष्यौर्घुष्यते घोषणायाम् ।। अर्थात् - सैकड़ों यज्ञों से पवित्र जो मेरा वंश पूर्वकाल की सभाओं में जनाकीर्ण यज्ञशाला की वेदध्वनियों से प्रकाशित हुआ था वहीं मेरे मरणावस्था में विद्यमान होने पर इन पापी तथा अयोग्य जनों के द्वारा (अपराध) घोषणा स्थल में घोषित किया जा रहा है।

Explanations:

‘‘मखशतपरिपूतं गोत्रमुद्भासितं यद्’’ यह कथन चारुदत्त का है। ‘‘मखशतपरिपूतं गोत्रमुद्भासितं मे सदसि निविऽचैत्यब्रह्मघोषै: पुरस्तात् । मम मरणदशायां वर्तमानस्य पापै स्तदसदृशमनुष्यौर्घुष्यते घोषणायाम् ।। अर्थात् - सैकड़ों यज्ञों से पवित्र जो मेरा वंश पूर्वकाल की सभाओं में जनाकीर्ण यज्ञशाला की वेदध्वनियों से प्रकाशित हुआ था वहीं मेरे मरणावस्था में विद्यमान होने पर इन पापी तथा अयोग्य जनों के द्वारा (अपराध) घोषणा स्थल में घोषित किया जा रहा है।