Correct Answer:
Option A - महादेवी वर्मा के ‘सप्तपर्णा’ काव्य संग्रह की कविताएँ वैदिक संस्कृत के विभिन्न काव्यांशों पर आधृत है।
‘सप्तपर्णा’ में महादेवी ने अपनी सांस्कृतिक चेतना के सहारे वेद, रामायण, अश्वघोष, कालिदास, भवभूति एवं जयदेव की कृतियों से तादात्म्य स्थापित करके 39 चयनित महत्वपूर्ण अंशो का हिन्दी काव्यानुवाद प्रस्तुत किया।
महादेवी वर्मा की अन्य प्रमुख काव्य कृतियाँ–
नीहार (1930 ई.), रश्मि (1932 ई.), नीरजा (1935 ई.), सांध्यगीत (1936 ई.), यामा (1940 ई.), दीपशिखा (1942 ई.), सप्तपर्णा (1960 ई.)।
महादेवी वर्मा कृत ‘सप्तपर्णा’ में ऋग्वेद के मंत्रों का हिन्दी काव्यानुवाद संकलित है। महादेवी वर्मा कृत ‘यामा’ में उनके नीहार, रश्मि नीरजा और सांध्यगीत के महत्वपूर्ण गीतों का संकलन किया गया है। ‘यामा’ काव्य संग्रह पर महादेवी वर्मा को 1982 ई० का ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्राप्त हुआ।
A. महादेवी वर्मा के ‘सप्तपर्णा’ काव्य संग्रह की कविताएँ वैदिक संस्कृत के विभिन्न काव्यांशों पर आधृत है।
‘सप्तपर्णा’ में महादेवी ने अपनी सांस्कृतिक चेतना के सहारे वेद, रामायण, अश्वघोष, कालिदास, भवभूति एवं जयदेव की कृतियों से तादात्म्य स्थापित करके 39 चयनित महत्वपूर्ण अंशो का हिन्दी काव्यानुवाद प्रस्तुत किया।
महादेवी वर्मा की अन्य प्रमुख काव्य कृतियाँ–
नीहार (1930 ई.), रश्मि (1932 ई.), नीरजा (1935 ई.), सांध्यगीत (1936 ई.), यामा (1940 ई.), दीपशिखा (1942 ई.), सप्तपर्णा (1960 ई.)।
महादेवी वर्मा कृत ‘सप्तपर्णा’ में ऋग्वेद के मंत्रों का हिन्दी काव्यानुवाद संकलित है। महादेवी वर्मा कृत ‘यामा’ में उनके नीहार, रश्मि नीरजा और सांध्यगीत के महत्वपूर्ण गीतों का संकलन किया गया है। ‘यामा’ काव्य संग्रह पर महादेवी वर्मा को 1982 ई० का ‘भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्राप्त हुआ।