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Q: महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पिछले मजदूरी-आधारित रोजगार कार्यक्रमों से प्रतिमान बदलाव लाता है–
  • A. ग्रामीण जनता के चतुर्दिक विकास पर ध्यान देकर
  • B. ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी-आधारित रोजगार को राज्य सरकारों के लिए कानूनी बाध्यता बनाकर
  • C. मजदूरी-आधारित रोजगार की कानूनी बाध्यता का उपबन्ध कर
  • D. ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी-आधारित रोजगार के जरिए खाद्य सुरक्षा को बढ़ाकर
Correct Answer: Option C - 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 क्रियान्वित किया गया था। यह अधिनियम पिछले मजदूरी आधारित रोजगार कार्यक्रमों से प्रतिमान बदलाव लाता है। क्योंकि यह मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी बाध्यता का उपबन्ध करता है तथा काम मागें जाने पर 15 दिन के भीतर रोजगार प्रदान किया जाता है, ऐसा न होने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाता हैं इसके अन्तर्गत एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारन्टी दी गयी है, तथा रोजगार सृजन हेतु विकास योजनाओं के नियोजन व क्रियान्वयन पंचायती राज संस्थानों की भूमिका सुनिश्चित की गयी है।
C. 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 क्रियान्वित किया गया था। यह अधिनियम पिछले मजदूरी आधारित रोजगार कार्यक्रमों से प्रतिमान बदलाव लाता है। क्योंकि यह मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी बाध्यता का उपबन्ध करता है तथा काम मागें जाने पर 15 दिन के भीतर रोजगार प्रदान किया जाता है, ऐसा न होने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाता हैं इसके अन्तर्गत एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारन्टी दी गयी है, तथा रोजगार सृजन हेतु विकास योजनाओं के नियोजन व क्रियान्वयन पंचायती राज संस्थानों की भूमिका सुनिश्चित की गयी है।

Explanations:

2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 क्रियान्वित किया गया था। यह अधिनियम पिछले मजदूरी आधारित रोजगार कार्यक्रमों से प्रतिमान बदलाव लाता है। क्योंकि यह मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी बाध्यता का उपबन्ध करता है तथा काम मागें जाने पर 15 दिन के भीतर रोजगार प्रदान किया जाता है, ऐसा न होने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाता हैं इसके अन्तर्गत एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारन्टी दी गयी है, तथा रोजगार सृजन हेतु विकास योजनाओं के नियोजन व क्रियान्वयन पंचायती राज संस्थानों की भूमिका सुनिश्चित की गयी है।