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Q: महाकवि कालिदास–विरचित ‘कुमारसंभव’ में किस रस की प्रमुखता है?
  • A. वीर रस
  • B. रौद्र रस
  • C. करुण रस
  • D. श्रंगार रस
Correct Answer: Option D - महाकवि कालिदास विरचित ‘कुमारसंभव में श्रृंगार रस की प्रमुखता है। कुमारसंभवम् (17 सर्ग)– इस ‘महाकाव्य’ में हिमालय की पुत्री पार्वती द्वारा घोर तपस्या के फलस्वरूप वर रूप में शिव को प्राप्त करने तथा उनसे कार्तिकेय की उत्पत्ति का वर्णन है। यह कालिदास का प्रथम महाकाव्य है। कालिदास कृत रचनाएँ– ऋतुसंहार (गीतिकाव्य), मेघदूतम् (गीतिकाव्य), कुमारसंभवम् (17 सर्ग) (महाकाव्य), रघुवंशम् (19 सर्ग) (महाकाव्य), मालविकाग्निमित्रम् (5 अंक) (नाटक), विक्रमोर्वशीयम् (5 अंक) (नाटक), अभिज्ञानशकुन्तलम् (7 अंक) (नाटक)।
D. महाकवि कालिदास विरचित ‘कुमारसंभव में श्रृंगार रस की प्रमुखता है। कुमारसंभवम् (17 सर्ग)– इस ‘महाकाव्य’ में हिमालय की पुत्री पार्वती द्वारा घोर तपस्या के फलस्वरूप वर रूप में शिव को प्राप्त करने तथा उनसे कार्तिकेय की उत्पत्ति का वर्णन है। यह कालिदास का प्रथम महाकाव्य है। कालिदास कृत रचनाएँ– ऋतुसंहार (गीतिकाव्य), मेघदूतम् (गीतिकाव्य), कुमारसंभवम् (17 सर्ग) (महाकाव्य), रघुवंशम् (19 सर्ग) (महाकाव्य), मालविकाग्निमित्रम् (5 अंक) (नाटक), विक्रमोर्वशीयम् (5 अंक) (नाटक), अभिज्ञानशकुन्तलम् (7 अंक) (नाटक)।

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महाकवि कालिदास विरचित ‘कुमारसंभव में श्रृंगार रस की प्रमुखता है। कुमारसंभवम् (17 सर्ग)– इस ‘महाकाव्य’ में हिमालय की पुत्री पार्वती द्वारा घोर तपस्या के फलस्वरूप वर रूप में शिव को प्राप्त करने तथा उनसे कार्तिकेय की उत्पत्ति का वर्णन है। यह कालिदास का प्रथम महाकाव्य है। कालिदास कृत रचनाएँ– ऋतुसंहार (गीतिकाव्य), मेघदूतम् (गीतिकाव्य), कुमारसंभवम् (17 सर्ग) (महाकाव्य), रघुवंशम् (19 सर्ग) (महाकाव्य), मालविकाग्निमित्रम् (5 अंक) (नाटक), विक्रमोर्वशीयम् (5 अंक) (नाटक), अभिज्ञानशकुन्तलम् (7 अंक) (नाटक)।