Correct Answer:
Option A - मेघदूतं मन्दाक्रान्ता छन्दसा निबद्धमस्ति। मेघदूतं मन्दाक्रान्ता छन्द में निबद्ध (रचित) है।
मन्दाक्रान्ता छन्द- ‘मन्दाक्रान्ता जलधिषडर्गैम्भौ नतौ ताद् गुरू चेत्।’ इसके प्रत्येक पाद में 17 वर्ण होते हैं। क्रमश: 1 मगण, 1 भगण, 1 नगण, 2 तगण, 2 गुरु। इसमें 4-6-7 पर यति होती है।
उपजाति- अनन्तरोदीरित लक्ष्मभाजौ, पादौ यदीयावुपजातयस्ता:।
उदाहरण-इत्थं किलान्यास्वपि, मिश्रितासु, स्मरनित जातिष्विदमेव नाम।।’’
मालिनी- ‘ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकै:।’
A. मेघदूतं मन्दाक्रान्ता छन्दसा निबद्धमस्ति। मेघदूतं मन्दाक्रान्ता छन्द में निबद्ध (रचित) है।
मन्दाक्रान्ता छन्द- ‘मन्दाक्रान्ता जलधिषडर्गैम्भौ नतौ ताद् गुरू चेत्।’ इसके प्रत्येक पाद में 17 वर्ण होते हैं। क्रमश: 1 मगण, 1 भगण, 1 नगण, 2 तगण, 2 गुरु। इसमें 4-6-7 पर यति होती है।
उपजाति- अनन्तरोदीरित लक्ष्मभाजौ, पादौ यदीयावुपजातयस्ता:।
उदाहरण-इत्थं किलान्यास्वपि, मिश्रितासु, स्मरनित जातिष्विदमेव नाम।।’’
मालिनी- ‘ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकै:।’